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Banda News: खेत तक लाने में दो हजार की पड़ रही डीएपी की 1350 की बोरी

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बांदा। किसानों की आय दोगुनी करने का दावा किया जा रहा है, पर उन्हें बोआई के समय खाद के लिए रोना पड़ रहा है। डीएपी की कमी से किसान कामकाज छोड़कर केंद्रों में रात-दिन इंतजार कर रहे हैं। डीएपी की एक बोरी की कीमत 1350 रुपये निर्धारित है, पर खेत तक पहुंचने में इसकी लागत दो हजार से ज्यादा हो जा रही है। किसानों को दस बार चक्कर लगाने में किराया भाड़ा खर्च करना पड़ रहा है। वहीं पीसीएफ के स्टॉक में खाद लगभग खत्म है। उन्हें नई रैक के लिए अभी सप्ताह भर का इंतजार करना होगा।
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पीसीएफ के अधिकारियों की मानें तो चित्रकूटधाम मंडल में अभी तक 14,233 टन डीएपी का वितरण कराया जा चुका है। बांदा में 3940, चित्रकूट में 2801, हमीरपुर में 4740 और महोबा में 2751 टन डीएपी किसानों को दी जा चुकी है। जबकि चारों जनपदों में अभी गेहूं की पूरी बोआई बकाया है। किसान पलेवा करने के बाद खाद की तलाश में केंद्रों पर भटक रहे हैं। उन्हें 50 किलोमीटर दूर केंद्र में खाद होने की जानकारी मिलती है तो वह किराये का वाहन लेकर वहां तक पहुंच जाते हैं। दिन हो या रात केंद्र के बाहर डेरा डाले हैं। डीएम ने केंद्रों पर उपद्रव न हो, इसके लिए एसडीएम, तहसीलदार और लेखपालों को लगाया है।
मौजूदा समय में पीसीएफ के बफर गोदाम में महज 150 डीएपी का स्टाक बचा है। इसे उन समितियों में भेजा जा रहा है, जहां बेहद जरूरी है या बवाल की संभावना है। सोमवार को ज्यादातर समितियों में खाद न होने से ताले लटकते रहे। उधर, किसानों का कहना है कि शासन ने डीएपी खाद की एक बोरी (50 किलो) के दाम 1350 रुपये निर्धारित किए हैं। यह सेंटरों में 1355 रुपये में दी जा रही है। इसके अलावा वह गांव से दस बार आते हैं और 11वीं बार आने पर ही एक बोरी खाद मिल रही है। टैक्सी-टेंपो व खुद का भाड़ा लगता है। इससे यह खाद उन्हें खेत तक ले जाने में दो हजार से ज्यादा की पड़ रही है।
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आज आंवला से रवाना होगी डीएपी खाद की रैक
बांदा। पीसीएफ के बफर और प्रीपोजशिनिंग स्टाक जहां साफ है, वहीं किसानों को नई रैक के लिए अभी सप्ताह भर का इंतजार करना होगा। डीएम की मांग पर शासन ने बांदा और चित्रकूट के लिए एक जंबो रैक डीएपी और दी है, जो मंगलवार को आंवला (बरेली) से बांदा के लिए रवाना होगी। जिले में खाद संकट को लेकर जिलाधिकारी नगेन्द्र प्रताप ने शासन को दो जंबो रैक डीएपी की मांग की थी। उनकी मांग पर शासन ने बांदा व चित्रकूट के लिए 2753 एमटी डीएपी की स्वीकृति दे दी है। कृषक परेशान न हों निजी दुकानदारों के यहां पर्याप्त मात्रा में डीएपी, एनपीके व सिंगल सुपर फास्फेट का स्टाॅक है। इसके अतिरिक्त 1200 बॉटल नैनों डीएपी भी सहकारी समितियों में उपलब्ध है। किसान इसका प्रयोग कर सकते हैं।
कोट
-सभी केंद्रों पर जरूरत के मुताबिक डीएपी खाद भेजी जा रही है। किसानों को यहां दो-दो बोरी डीएपी दी जा रही है। दो-तीन दिन में डीएपी की रैक आने के बाद किसानों को पर्याप्त खाद मिलेगी।
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-विजय कुमार, उप निदेशक कृषि
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