बांदा। परिषदीय विद्यालयों में भले ही भवन में मरम्मत की आवश्यकता है तो कहीं विद्युत उपकरण खराब पड़े हैं। इसके बाद भी जिले के 1316 परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने कंपोजिट ग्रांट का एक रुपया खर्च नहीं किया। शासन से पत्र आने के बाद बीएसए ने सख्ती दिखाई तो अब जल्द बजट ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू हो गई। 31 जुलाई तक बीएसए ने हर हाल में धनराशि खर्च करने के आदेश दिए हैं।
वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अभियान के तहत जून और जुलाई में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को 3.98 करोड़ रुपये जारी किए गए लेकिन 25 जुलाई तक विद्यालय केवल 85 लाख रुपये ही खर्च कर सके, जो कुल आवंटित धनराशि का 21.47 प्रतिशत है। इसमें 1316 विद्यालयों ने तो एक रुपया भी खर्च नहीं किया। विभाग ने इसे अत्यंत कम प्रगति मानते हुए नाराजगी जताई है।
विभाग की समीक्षा में यह भी सामने आया कि जनपद के सैकड़ों विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया और उनका व्यय प्रतिशत शून्य है। शासन के पत्र के बाद बीएसए अव्यक्तराम तिवारी ने इन विद्यालयों की अलग से सूची जारी कर संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को नियमित निगरानी और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बीएसए ने स्पष्ट किया है कि सभी विद्यालयों को 31 जुलाई तक धनराशि का व्यय कर उपभोग प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
छह दिन में सिर्फ कागजों में ही खर्च होगी धनराशि
बीएसए ने धनराशि खर्च के लिए 24 जुलाई को पत्र जारी किया। 25 जुलाई को भी अगर मान लें कि यह पत्र शिक्षकों तक पहुंच गया तो भी उनके पास धनराशि खर्च करने के लिए सिर्फ छह दिन ही शेष हैं। इसमें से भी एक दिन रविवार निकल गया। अब ऐसे में तो भवन की रंगाई-पुताई, मरम्मत, स्टेशनरी खरीद या अन्य कार्य संभव नहीं होंगे। सूत्रों के अनुसार शिक्षक भी अपनी गर्दन बचाने के लिए फर्जी बिल वाउचर लगाकर पूर्ण धनराशि का उपभोग दिखाने की जुगत में जुट गए हैं।