बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में अब तक 13 संक्रमितों ने कोरोना की जंग जीत ली है। वायरस को मात देकर घर पहुंच गए। इनमें सबसे ज्यादा बांदा में 13 ने यह जंग जीती है। मंडल के चारों जिलों में अब तक 33 लोग कोरोना संक्रमण की गिरफ्त में आ चुके हैं। 20 संक्रमित अभी भी इस खतरनाक मर्ज से जूझ रहे हैं। संक्रमितों में अधिकांशत: महानगरों से लौटे मजदूर या उनके संपर्क में आने वाले लोग हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में कोरोना संक्रमण ने पहली बार दस्तक 29 मार्च को दी। शहर के गूलरनाका निवासी युवक को जांच में पॉजिटिव पाया गया। यह युवक निजामुद्दीन मरकज से कुछ दिन पहले ही लौटा था। मेडिकल कालेज में क्वारंटीन और आइसोलेट रहने के बाद स्वस्थ हो गया। अप्रैल के दूसरे हफ्ते में उसे डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया।
इसके बाद यहां संक्रमितों की संख्या बढ़ती चली गई। सबसे ज्यादा एक मुश्त 10 पॉजिटिव रिपोर्ट 7 मई को आई। इनमें तीन चित्रकूट के मजदूर भी शामिल थे। मौजूदा में बांदा जिले में संक्रमितों की संख्या 24 है। इनमें तीन निगेटिव हो चुके हैं। साथ ही तीन चित्रकूट के संक्रमित मजदूरों को चित्रकूट जिले के खाते में दर्ज कर दिया गया है। बांदा की मौजूदा स्थिति में 10 मरीजों को दुरुस्त हो जाने पर मेडिकल कालेज से डिस्चार्ज किया जा चुका है। 11 मरीज अभी भी सक्रिय हैं।
मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि चित्रकूट जिले में आठ पॉजिटिव केस हैं। इनमें एक संक्रमण मुक्त हो जाने पर डिस्चार्ज किया जा चुका है। मौजूदा समय में यहां सात संक्रमित मरीज हैं। महोबा में तीन पॉजिटिव मरीजों में दो दुरुस्त हो जाने पर डिस्चार्ज किए गए हैं।
यहां केवल एक एक्टिव मरीज है। हमीरपुर में एक पॉजिटिव मरीज है। वह मौजूदा में सक्रिय है। पूरे मंडल में अब तक कुल 33 पॉजिटिव में 13 को संक्रमण मुक्त हो जाने पर मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड से डिस्चार्ज कर 14 दिन के क्वारंटीन में भेज दिया गया है। 20 संक्रमितों का इलाज चल रहा है।
जनपद पॉजिटिव डिस्चार्ज सक्रिय संक्रमित
बांदा 21 10 11
चित्रकूट 08 01 07
महोबा 03 02 01
हमीरपुर 01 00 01
योग 33 13 20
कहां गुम हो गए ट्रेनों से लौटे 393 प्रवासी मजदूर
बांदा। विशेष ट्रेनों में लौटे 393 प्रवासी मजदूर कहां गए? ट्रेन से कहीं रास्ते में ही उतर गए या सरकारी अमले से आंख बचाकर अपने ठिकाने पहुंच गए। ट्रेनों में यात्रियों के आंकड़े कुछ यही बता रहे हैं। अधिकारी इस बारे में कुछ भी बता पाने में खामोश हैं।
यहां अब तक तीन ट्रेनें श्रमिकों को लेकर आ चुकी हैं। अभी तीन और आनी बाकी हैं। पहली ट्रेन 7 मई को यहां सूरत से आई थी। इस ट्रेन में 1220 मजदूरों की रवानगी बताई गई थी, लेकिन यहां बांदा रेलवे स्टेशन में 1074 ही दर्ज हुए। 146 मजदूरों का कोई हिसाब-किताब नहीं। इसी तरह 13 मई को दूसरी ट्रेन बड़ोदरा से यहां आई। इसमें 1908 मजदूर रवाना होना बताए गए थे, लेकिन यहां मात्र 1570 ही पहुंचे।
338 मजदूर कहां गए? कुछ पता नहीं। तीसरी ट्रेन गुरुवार को तड़के करीब 2.15 बजे सूरत से यहां बांदा आई। इसके आंकड़े उपरोक्त दोनों ट्रेनों से थे। इस ट्रेन में 1600 मजदूरों के आने का आंकड़ा बताया गया था, जबकि यहां आए मजदूरों की संख्या 1691 दर्ज हुई है। यानी 91 मजदूर अधिक आए हैं। तीनों ट्रेनों में निर्धारित संख्या से 393 श्रमिकों का कोई लेखाजोखा नहीं है। इस बाबत मंडलायुक्त गौरव दयाल का कहना है कि मजदूरों के यह आंकड़े रेलवे और संबंधित विभागों से प्राप्त हुए हैं।