फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किराये या पराए भवनों के 35 आयुर्वेदिक अस्पताल होंगे बंद

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदीप द्विवेदी
विज्ञापन

बांदा। चित्रकूट और बांदा जनपद में चल रहे 37 आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सालयों में से 35 पर ताला बंदी का खतरा मंडराने लगा है। यह अस्पताल किराये के भवनों में चल रहे हैं। अब शासन ने किराये या पराये भवनों में चलने वाले आयुर्वेद अस्पतालों को बंद करने का निर्देश दिया है।

आयुर्वेद और यूनानी पद्धति से इलाज कराने वालों की संख्या काफी है। इसी के मद्देनजर प्रदेश में यह अस्पताल चलाए जा रहे हैं। बुंदेलखंड के सभी जिलों में ग्रामीण मरीजों का इन अस्पतालों के प्रति काफी रुझान है। लंबे अरसे से अधिकांश अस्पताल किराये के मकानों या पंचायत भवनों में चल रहे हैं।
विज्ञापन


बांदा जनपद में कुल 23 आयुर्वेदिक और 4 यूनानी अस्पताल चल रहे हैं. चित्रकूट में 8 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। महज दो अस्पताल ही सरकारी भवन में स्थित हैं। 20 अस्पताल किराये के भवनों और 10 अस्पताल पंचायत भवनों या प्राथमिक विद्यालय अथवा सहकारी समिति के भवनों में चल रहे हैं। गौरतलब है कि सप्ताह भर पहले पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने आयुष डाक्टरों को सीएचसी और पीएचसी में अटैच करने का निर्देश दिया था।

आयुष चिकित्सकों को प्रशिक्षित कराकर उन्हें 15 एलोपैथिक दवाएं लिखने की भी छूट दी गई है। इससे चिकित्सकों के साथ इस पद्धति पर भरोसा करने वाले मरीजों को भी राहत मिली थी।



किराए पर संचालित अस्पताल
नगर क्षेत्र के मंडी परिषद स्थित 15 शैया आयुर्वेदिक अस्पताल, बड़ोखर ब्लाक के हरदौली, पल्हरी, तिंदवारी ब्लाक के सेमरी, चिल्ला, बरेठीकला, बेंदाघाट, महुआ ब्लाक में अनतुवा, नगनेधी, गिरवां, बतौरा, नरैनी में सढ़ा, करतल, पंचमपुर, बिसंडा ब्लाक में सिंहपुर, ओरन, गौरी कलां व यूनानी अस्पताल में हरदौली, अनौसा, औगासी। चित्रकूट जिले में भरतकूप (पंचायत भवन), इंटवा, खंडेहा, बरगढ़, रानीपुर, भदेहदू, अतरौली अस्पताल शामिल हैं।



चिकित्सकों के 27 में 21 पद खाली
आयुष चिकित्सकों के जनपद में 23 पद स्वीकृत हैं। लेकिन इनमें महज 3 चिकित्सक तैनात हैं। फार्मासिस्ट के 22 पदों में 6 खाली हैं। यूनानी अस्पतालों में चिकित्साधिकारी व फार्मासिस्ट के 4-4 पद हैं। इनमें चिकित्साधिकारी का एक व फार्मासिस्ट के 3 पद रिक्त हैं। आयुर्वेदिक अस्पतालों में एक चिकित्सक को तीन-तीन अस्पतालों का जिम्मा दिया गया है।
विज्ञापन



‘आयुष डाक्टरों की कमी पहले से है। किराए के भवनों में संचालित होने वाले अस्पतालों को यदि बंद कराया जाएगा तो जितने हमारे पास चिकित्सक हैं उनको सरकारी भवनों वाले अस्पतालों में शिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल उन्हें यह आदेश नहीं मिला है।’
डॉ.वरुण कुमार गुप्ता,
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी, बांदा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें