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आखिर क्यों एक दिव्यांग को अपने भाई की वजह से ट्रेन के शौचालय में फांसी लगानी पड़ी

Tue, 14 Nov 2017 12:55 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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ट्रेन के अन्दर आत्महत्या करने के मामले कम ही सुनने को आते हैं लेकिन जब ऐसा कुछ होता है तो मजबूरी बड़ी होती है। ऐसी ही एक मजबूरी के चलते एक दिव्यांग ने ट्रेन के शौचालय में फांसी लगाकर जान दे दी। कहा जा रहा है कि अपने भाई को लेकर दिव्यांग काफी परेशान था और इसी के चलते क्षुब्ध होकर उसने ये कदम उठाया।
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नैनी जेल में बंद भाई से मिलकर लौट रहे निशक्त ने ट्रेन के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। देर तक दरवाजा न खुलने पर मां ने ट्रेन में मौजूद अन्य परिजनों को सूचना दी। यात्रियों की मदद से परिजनों ने शव को बाहर निकाला।

महोबा जिले के परसाहा (कबरई) गांव का अरविंद (27) शनिवार की रात बनारस से ग्वालियर जा रही बुंदेलखंड एक्सप्रेस ट्रेन के शौचालय में पाइप लाइन में साफी बांध कर फांसी पर झूल गया। मां श्यामरानी ने बताया कि अरविंद आंखों से निशक्त था। देर तक शौचालय से बाहर न आने पर उसने ट्रेन पर मौजूद अपनी बेटी केसर और दामाद प्रमोद को सूचना दी।
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शौचालय पहुंचे और दरवाजे का हुक घुमाकर अंदर देखा तो अरविंद अपने साफी से पानी के पाइप में लटका हुआ था। कुछ देर बाद अरविंद ने ट्रेन पर दम तोड़ दिया। मृतक के बहनोई ने बताया कि अरविंद का बड़ा भाई अशोक नैनी जेल में अजीवन कारावास में बंद है। बड़े भाई जेल में बंद होने की बात पर अरविंद काफी तनावग्रस्त और परेशान रहता था। 

उधर, जीआरपी थानाध्यक्ष बीएल प्रजापति ने बताया कि उन्हें कंट्रोलर से सूचना मिली थी कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस ट्रेन में एक निशक्त यात्री की हालत काफी खराब है। ट्रेन के बांदा पहुंचने के पूर्व ही उसकी मौत हो चुकी थी। उसका शव ट्रेन से नीचे उतारा गया। मामले जांच की जा रही है। थानाध्यक्ष का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह पता चलेगी।

हत्या के मामले में जेल में बंद बड़े भाई अशोक के मुकदमेबाजी में अरविंद ने अपनी और मां के नाम 3-3 बीघा जमीन भी बेच दी थी। बहनोई के मुताबिक ससुर मनीराम की हत्या 2011 कर दी गई थी। कुछ दिन बाद अशोक भी हत्या के मामले में जेल चल गया। पिता की मौत और बड़े भाई के जेल में बंद होने के बाद निशक्त अरविंद और उसकी मां मेरे साथ में बरुवा (छतरपुर) में रहता था।
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