बलरामपुर। चूहा-छछूंदर नियंत्रण अभियान से संक्रामक बीमारियों पर अंकुश लगाने की कवायद शुरू की गई है। जिले की 101 न्याय पंचायतों में सोमवार को जागरूकता कार्यक्रम कराया गया। संक्रामक बीमारियों के प्रति ग्रामीणों को सजग करने के लिए 31 जुलाई तक जागरूकता कार्यक्रम कराए जाएंगे। कृषि विभाग के 107 प्रशिक्षित कर्मचारियों को गांवों में जागरूकता कार्यक्रम कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उप कृषि निदेशक डॉ. प्रभाकर सिंह, जिला कृषि अधिकारी आरपी राना व जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रेश कुमार गौतम की निगरानी में चूहा-छछूंदर नियंत्रण अभियान शुरू किया गया है। जिले की 101 न्याय पंचायतों में दूसरी बार ये अभियान शुरू किया गया है। एक से 31 जुलाई तक 438 जागरूकता कार्यक्रम कराए जाएंगे, जिसमें 428 गोष्ठी व बैठकों को शामिल किया गया है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि चूहे-छछूंदर संक्रामक बीमारियों को फैलाने में वाहक की भूमिका निभाते हैं। एक घर से दूसरे घर में जाकर संक्रामक बीमारियों का आदान-प्रदान करते हैं। चूहों के प्राकृतिक शत्रु बिल्ली, सांप, उल्लू, लोमड़ी, बाज व चमगादड़ हैं। चूहेदानी का प्रयोग कर चूहों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। घरों में ब्रोमोडियोलान 0.005 फीसदी के बने चारे की 10 ग्राम मात्रा बिलों में रखने से चूहे इसे खाकर मर जाते हैं। जिंक फास्फाइड 80 फीसदी की एक ग्राम मात्रा को एक ग्राम सरसों के तेल व 48 ग्राम भुने दाने में बनाए गए चारे को बिल में रखें, जिसे खाकर चूहे मर जाते हैं।
श्रीदत्तगंज ब्लॉक के प्रभारी कृषि रक्षा इकाई सेवाराम ने ग्राम पंचायत चवई बुजुर्ग, कृषि रक्षा प्रभारी रेहरा बाजार के ग्राम रेहरा में, कृषि रक्षा इकाई उतरौला ब्लॉक के प्रभारी सुचारु सिंह, ग्राम महदेइया शिवपुर में प्रभारी विनय कुमार और गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के ग्राम धोबहा में क्षेत्र परिचारक महेश कुमार वर्मा आदि ने ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियों को फैलाने वाले चूहा-छछूंदर नियंत्रण अभियान के बारे में जानकारी दी।