बलरामपुर। हरैया सतघरवा क्षेत्र के मोतीपुर कला निवासी आशाराम के पास दो भैंस और दो बैल थे। करीब 15 दिन पहले बीमारी से एक भैंस की मौत हो गई। इससे उन्हें करीब 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ। अब वह पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण की अहमियत समझ रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में अभी तक किसी भी पशु का टीकाकरण नहीं हुआ है। ऐसे में वह पशुपालन विभाग की टीम के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
आशाराम का मामला अकेला नहीं है। जिले में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए 22 जुलाई से सात अगस्त तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया। इसकी जमीनी पड़ताल में कई गांवों में पशुपालकों ने टीम के नहीं पहुंचने या कुछ पशुओं के टीकाकरण से छूट जाने की जानकारी दी। दूसरी ओर विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में 1,97,628 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1,87,750 वैक्सीन प्राप्त हुई हैं, लेकिन अब तक केवल 23,463 पशुओं का ही टीकाकरण हो सका है। यह लक्ष्य का महज 11.87 प्रतिशत है। इस हिसाब से 1,74,165 पशु अभी टीकाकरण से बाहर हैं।
कहीं टीम पहुंची तो कहीं पशुपालक करते रहे इंतजार
तुलसीपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बल्दीडीह में करीब 55 पशुओं में से 36 का टीकाकरण हुआ, जबकि 19 पशु छूट गए। रामगढ़ मैटहवा में पशु चिकित्साधिकारी कौवापुर डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार 60 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। वहीं, जोगीवीर निवासी गुड्डे वर्मा ने बताया कि उनके पशुओं का अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ है। हसनापुर के मजरा मुरहवा निवासी अखिलेश कुमार ने भी पशुओं को टीका नहीं लगने की बात कही।
चैनवापुर में 11 पशुपालकों ने अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं होने की जानकारी दी। इसके विपरीत जीजाखोर निवासी विजय कुमार ने बताया कि पशु चिकित्सक उनके घर पहुंचे और उनकी पांचों भैंसों का टीकाकरण किया। रेंडवलिया निवासी कृपाराम ने बताया कि टीका लगने के बाद उनकी भैंस को दस्त की शिकायत हुई। हालांकि, चिकित्सकीय जांच के बिना यह कहना संभव नहीं है कि दस्त की वजह टीकाकरण ही था।
जिले के अलग-अलग गांवों में टीकाकरण की स्थिति एक जैसी नहीं मिली। कहीं टीम पहुंची और पशुओं का टीकाकरण हुआ तो कहीं पशुपालक अब भी टीम के आने का इंतजार कर रहे हैं।
अधिकांश पशुओं के कान में नहीं मिला टैग
जमीनी पड़ताल के दौरान कई पशुओं के कान में टैग लगा हुआ नहीं मिला। ऐसे में विभागीय रिकॉर्ड, मौके पर मौजूद पशुओं, कान में लगे टैग और टीकाकरण रजिस्टर का मिलान कराया जाना जरूरी है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज टीकाकरण और गांवों में वास्तव में हुए टीकाकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार अब तक करीब 11 हजार पशुओं को टैग लगाया गया है।
हड़ताल से प्रभावित हुआ अभियान
पशु चिकित्साधिकारी कौवापुर डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि वेटनरी पशुमित्रों की हड़ताल के कारण टीकाकरण अभियान प्रभावित हुआ। इसका असर गांवों तक टीम की पहुंच पर भी पड़ा। अभियान सात अगस्त तक पूरा होना था, लेकिन हड़ताल के चलते शत-प्रतिशत टीकाकरण नहीं हो सका।
फोटो-1-ग्राम पंचायत गूमा फातमा जोत के मजरा चैनवापुर में गोवंश के साथ मौजूद पशुपालक ।-संवाद
फोटो-1-ग्राम पंचायत गूमा फातमा जोत के मजरा चैनवापुर में गोवंश के साथ मौजूद पशुपालक ।-संवाद
फोटो-1-ग्राम पंचायत गूमा फातमा जोत के मजरा चैनवापुर में गोवंश के साथ मौजूद पशुपालक ।-संवाद