बलरामपुर। नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। राजशाही की समाप्ति के बाद वर्ष 2008 में नेपाल धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बना था। अब वहां हिंदू राष्ट्र की पुनर्बहाली और राजशाही की वापसी की मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाजें उठ रही हैं। इस घटनाक्रम के बीच भारत-नेपाल सीमा से जुड़े बलरामपुर में पड़ोसी देश के साथ सदियों पुराने धार्मिक और सामाजिक रिश्तों की चर्चा भी तेज हो गई है।
बलरामपुर और नेपाल का संबंध महज पड़ोसी होने तक सीमित नहीं है। तुलसीपुर स्थित देवीपाटन मंदिर दोनों देशों की साझा धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। नेपाल के दांग जिले से हर वर्ष पीर रतननाथ की शोभायात्रा देवीपाटन पहुंचती है। इसमें नेपाल और भारत के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। राजनीतिक और संवैधानिक बदलावों के बावजूद यह परंपरा लगातार जारी है।
नेपाल में 1768 से 2008 तक राजशाही रही और लंबे समय तक देश की पहचान हिंदू राष्ट्र के रूप में रही। भारत-नेपाल की खुली सीमा के कारण दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच आवागमन भी सहज रहा है। बलरामपुर के जरवा, मणिपुर, बदरौलिया, तुलसीपुर, गैसड़ी और पचपेड़वा क्षेत्र का नेपाल के दांग सहित आसपास के इलाकों से व्यापारिक, पारिवारिक और सामाजिक संपर्क रहा है। सीमा के दोनों ओर लोगों की रिश्तेदारियां भी हैं।
जनकपुर स्थित मुक्तेश्वर नाथ महादेव मंदिर के पुजारी पंडित प्रदीप पांडेय ने बताया कि वर्ष 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद नेपाल को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया गया। इससे देश की संवैधानिक पहचान बदली, लेकिन भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ धार्मिक और सामाजिक संबंधों पर इसका खास असर नहीं पड़ा।
उन्होंने बताया कि आज भी नवरात्र के दौरान नेपाल से श्रद्धालु देवीपाटन मंदिर के साथ ही मुक्तेश्वर नाथ और रहिया देवी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी तरह भारत से श्रद्धालु नेपाल के स्वर्गद्वारी आश्रम (प्यूठान), रतननाथ मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर और मुक्तिनाथ मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। पंडित प्रदीप पांडेय ने नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का समर्थन किया।
मौजूदा माहौल में सीमा पर सतर्कता बढ़ी
नेपाल में हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग को लेकर चल रही गतिविधियों के साथ हाल के राजनीतिक एवं सामाजिक घटनाक्रम को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी भी बढ़ाई गई है। बलरामपुर से लगी कोयलाबास सीमा संवेदनशील मानी जाती है। यहां एसएसबी के जवानों के साथ स्थानीय प्रशासन भी सीमा क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखता है।
सीमा के दोनों ओर लोगों की आवाजाही, व्यापार और धार्मिक यात्राएं सामान्य रूप से जारी रहें, इसके लिए सुरक्षा एजेंसियां सतर्कता बरत रही हैं। जरवा के प्रभारी निरीक्षक योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि सीमा क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई गई है। एसएसबी और वन विभाग की टीम के साथ नियमित गश्त की जा रही है।
फोटो-32-पंडित प्रदीप पांडेय