बलरामपुर। यूपी बोर्ड, सीबीएसई व सीआईएससीई की 12वीं की बोर्ड परीक्षा में जिले में करीब 13 हजार छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए हैं। जो डिग्री कॉलेजों के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। इनके सापेक्ष जिले में आठ डिग्री कॉलेज हैं, जिनमें स्नातक की करीब सात हजार सीटें हैं। ऐसे में प्रत्येक सीट पर करीब दो छात्रों की दावेदारी है। ऐसी स्थिति में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान छात्रों के बीच मारामारी मचनी तय है।
जिले में मात्र एक राजकीय महाविद्यालय हैं, जिसमें 480 छात्र ही प्रवेश ले सकते हैं। जबकि, सहायता प्राप्त महारानी लाल कुंवारी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में सबसे ज्यादा स्नातक की 4,000 सीटें हैं। वहीं, जिले में फैसल डिग्री कॉलेज तुलसीपुर, प्रागदेवी रामफल कॉलेज उतरौला, हाजी इस्माइल कॉलेज सदुल्ला नगर, शक्ति स्मारक संस्थान दुल्हिनपुर, रामतिरथ चौधरी कॉलेज एमिलिया बनघुसरा, विमला विक्रम कॉलेज पचपेड़वा, चौधरी लालता प्रसाद सिंह बौद्ध कॉलेज श्रीदत्तगंज संचालित हैं। इन सभी निजी, राजकीय व अनुदानित कॉलेजों में कुल सात हजार सीटें हैं।
गत 20 अप्रैल को यूपी बोर्ड का परीक्षा परिणाम जारी हुआ था। जिसमें इंटरमीडिएट के 11,518 परीक्षार्थी पास हुए थे। वहीं, मई माह में सीबीएसई व सीआईएससीई के इंटर के करीब डेढ़ हजार विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए इन सभी छात्रों ने काॅलेजों का चक्कर लगाना शुरू कर दिया है। सीटें कम होने और छात्रों की संख्या अधिक होने के चलते स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए मारामारी मचेगी। अभी प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, हालांकि छात्रों से आवेदन मंगाए जा रहे हैं। प्रवेश प्रक्रिया शुरू होते ही छात्रों को एक-एक सीट के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
वहीं, राजकीय महाविद्यालय बिलोहा बनकसिया, गैसड़ी का संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है। यदि यह इस सत्र में शुरू हो जाता है तो सीटें बढ़ने से कुछ हद तक छात्रों को राहत मिल सकेगी।
एमएलके पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय का कहना है कि महाविद्यालय में सम-सेमेस्टर की परीक्षाओं के चलते प्रवेश प्रक्रिया में देरी हो रही है। 15 मई को परीक्षा समाप्त हुई है। अब इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इंटर उत्तीर्ण छात्र आवेदन कर सकते हैं। अभी सीटें नहीं बढ़ी हैं, लेकिन बढ़ाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
- भानु प्रताप सिंह, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय पचपेड़वा