लंपी वायरस से पीड़ित गोवंश। (सांकेतिक)
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यूपी के बलरामपुर में लंपी वायरस (गांठदार त्वचा रोग) को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने एहतियातन बाहरी प्रभावित जिलों से मवेशियों के आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। विभाग की तरफ से पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। निगरानी व्यवस्था तेज कर दी गई है।
जिले में अब तक 12 पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण पाए गए थे। इनमें से 10 पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। दो पशुओं में हल्के लक्षण पाए गए हैं, जिन्हें अलग रखकर उपचार कराया जा रहा है। संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए गांव-गांव जाकर जांच और टीकाकरण किया जा रहा है। जिले को 16 हजार डोज वैक्सीन प्राप्त हुई थी। इनमें से नौ हजार डोज पशुओं को लगाई जा चुकी हैं। वर्तमान में 115 गौ-आश्रय स्थलों पर 12,768 गोवंश संरक्षित हैं।
विभाग की टीमें लगातार आश्रय स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण कार्य का निरीक्षण कर रही हैं। रेहरा बाजार क्षेत्र के किरतापुर, रेहरा डिहवा और महुआ गांवों में दो-दो गोवंशों में तथा सदर विकास खंड के पांच मवेशियों में लंपी वायरस के लक्षण मिले थे। फार्मासिस्ट राकेश कुमार ने बताया कि सभी प्रभावित गांवों में टीकाकरण कार्य पूरा कर लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।
लंपी वायरस के लक्षण
लंपी वायरस, जिसे गांठदार त्वचा रोग भी कहा जाता है, गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाली संक्रामक बीमारी है। यह पॉक्सविरिडे परिवार के नीथलिंग वायरस से फैलती है। इससे पशुओं को तेज बुखार आता है, शरीर पर गांठें बन जाती हैं, पैरों में सूजन आती है और दूध उत्पादन कम हो जाता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि लंपी रोग को देखते हुए विभाग सतर्क है। पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। पशुपालकों को भी सजग किया जा रहा है। अब तक करीब 16 हजार वैक्सीन मिली हैं। इसे लगाने के लिए वितरण किया जा चुका है। जिन जिलों में रोग फैला है, वहां से मवेशियों के आवागमन पर रोक लगाई गई है।