फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में नहीं है दिल के दर्द का इलाज

विज्ञापन
विज्ञापन
बलरामपुर। जिले में दिल के दर्द का इलाज नहीं है। यहां के हृदय रोगियों को इलाज के लिए लखनऊ व दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। आधुनिक सुविधाओं से लैस संयुक्त जिला चिकित्सालय व जिला मेमोरियल चिकित्सालय में अभी तक कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। कार्डियोलाजिस्ट न होने से यहां के हृदय रोगियों को इलाज के लिए बाहर जाकर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
विज्ञापन

बलरामपुर में तीन जिला स्तरीय अस्पताल सहित नौ सीएचसी भी हैं। सरकार शहरी क्षेत्र तो दूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करने का दावा कर रही है। मगर सरकार के दावों की हकीकत ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दूर जिला अस्पतालों में भी दिल के दर्द का कोई इलाज नहीं है। करीब 10 साल से लगातार मांग के बावजूद जिले में एक भी कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं की गई है।
कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती न होने से जहां संपन्न हृदय रोगी बाहर जाकर अधिक पैसे खर्च करके इलाज करा लेते हैं वहीं गरीब तबके के लोगों को हृदय रोग विशेषज्ञ न होने का खामियाजा अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है। जबकि दिल की बीमारी से हर साल दर्जनों लोगों की मौत हो जाती है। आए दिन हार्टअटैक से मौत के मामलों को प्रशासनिक अफसरों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों द्वारा भी नजरअंदाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बार-बार विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की मांग शासन स्तर पर भेजी जा रही है फिर भी जिले में कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती न होने से यहां दिल की बीमारी लाइलाज बनी हुई है।
विज्ञापन

हृदय रोगियों को त्वरित उपचार देने के लिए जिले में हृदय रोग विशेषज्ञों के दो पद सृजित है। संयुक्त जिला चिकित्सालय व जिला मेमोरियल अस्पताल में एक-एक पद सृजित है। इसके बावजूद दोनों अस्पतालों में करीब 10 वर्ष से कोई भी हृदयरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं किया गया है। कार्डियोलाजिस्ट तैनात न होने से अस्पताल आने वाले हृदय रोगियों को गैर जनपद रेफर कर दिया जाता है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि जिले में कई वर्षों से कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। इसके साथ-साथ कई अन्य विभागों के भी विशेषज्ञों की कमी है। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कार्डियोलाजिस्ट के साथ ही अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों के तैनाती की मांग शासन स्तर से की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें