बलरामपुर के जंहदरिया गांव में मिला तेंदुए का पगचिह्न।-संवाद
गौरा चौराहा (बलरामपुर)। सोहेलवा जंगल के तुलसीपुर यूनिट के जहंदरिया गांव में प्याज के खेत में जो पगचिह्न मिले हैं वो तेंदुए केनिहीं बल्कि सियार या किसी अन्य जानवर के हैं। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के निर्देश पर उप प्रभागीय वनाधिकारी मनोज कुमार की जांच में खुलासा हुआ।
वन दरोगा मनमोहन पांडेय ने सोमवार को बताया कि जहंदरिया गांव में ग्रामीणों की मदद से पगचिह्न का ब्योरा जुटाया। तेंदुए व बाघ के पगचिह्न में नाखूनों के निशान नहीं आते हैं। जबकि लकड़बग्घा, सियार, सोनकुत्ता व गीदड़ के पैरों में नाखून होते हैं, जो पगचिह्न में स्पष्ट हो जाते हैं। वन दराेगा ने ग्रामीणों से बताया कि डरे नहीं, बल्कि सतर्क रहें।
भोजन व पानी की तलाश में कभी-कभार जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में आ जाते हैं। कन्हैया लाल, रामरूप यादव, अतीक अहमद, राजेंद्र विश्वकर्मा, झिनकन प्रसाद, बिहारी, हुसैनी यादव व रमजान आदि ने बताया कि क्षेत्र के कई गांवों में तेंदुए अक्सर दिखाई देते हैं। इससे पहले तेंदुओं के कई हमले भी हो चुके हैं। इसी के चलते ग्रामीणों में डर है। दरअसल बीत दिन ग्रामीणों को खेत में जानवर के पंजों के निशान दिखाई दिए थे, ग्रामीण तेंदुए को लेकर डरे हुए थे।