गैड़ास बुजुर्ग (बलरामपुर)। राप्ती नदी की कटान से गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के तकियवा गांव के लोग सहमे हुए हैं। राप्ती नदी ने 20 किसानों की 112 बीघे जमीन पिछले वर्ष छीन ली थी। इस वर्ष घरों पर राप्ती नदी की कटान का संकट बढ़ गया है। परेशान ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव के पास कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है, जिससे लोगों के घरों को राप्ती नदी की कटान से सुरक्षित किया जा सके।
राप्ती नदी की बाढ़ व कटान का असर जिले की तीनों तहसीलों पर पड़ता है। अकेले उतरौला तहसील में सबसे अधिक नुकसान होता है। तकियवा गांव भी हर साल बाढ़ आपदा की चपेट में आता है। गांव निवासी मुंशी बताते हैं कि बाढ़ के समय राप्ती नदी की धारा का तेज बहाव लोगों को डराता है। गांव के किसान केवल रबी की फसल पर ही निर्भर हैं। खरीफ की फसल बाढ़ के कारण हर वर्ष चौपट हो जाती है।
वहीं, नदी की कटान से किसानों के खेत भी समाहित हो गए हैं, जिससे लोगों को अपना परिवार पालने के लिए दूसरे शहरों में मजदूरी करनी पड़ती है। तौफीक की 10 बीघे जमीन, मुंशी की 10 बीघे, रामचरन की पांच बीघे, जाकिर अली की 15 बीघे, खातिर अली की पांच बीघे, दुखी यादव की 10 बीघे, मिश्रीलाल की 10 बीघे व शाह मोहम्मद की 10 बीघे जमीन को राप्ती नदी काट चुकी है। यदि कटानरोधी कार्य न हुआ तो घरों के कटने पर तकियवा के लोग बेघर हो जाएंगे।
सिर्फ आश्वासन, कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि हम लोग कई वर्षों से कटानरोधी कार्य कराने के लिए प्रशासन से मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। गांव की तरफ राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है, जिससे स्थिति और भयावह हो रही है।
प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश
तकियवा गांव के पास कटानरोधी कार्य के लिए बाढ़ खंड को प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश दे दिया गया है। जैसे ही शासन से बजट स्वीकृत होगा, कटानरोधी कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- अभय कुमार सिंह, एसडीएम उतरौला