लरामपुर के गुमड़ी गांव में हैंडवास बनाती महिलाएं ।-संवाद
महदेइया बाजार (बलरामपुर)। गांव की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। गुमड़ी गांव की ज्योति स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इसका उदाहरण हैं। इन महिलाओं ने न केवल दिव्यांगता जैसी चुनौती को पीछे छोड़ा, बल्कि मेहनत और संकल्प के बल पर आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिखी।
वर्ष 2022 में ज्योति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष अधिकारी देवी के नेतृत्व में बने इस समूह ने मात्र 80 हजार रुपये के ऋण से हैंडवाश निर्माण का कार्य शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद इनके हौसले बुलंद थे। छह सदस्यीय समूह में दो महिलाएं मीना और गीता कुमारी दिव्यांग हैं। लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। आज इस समूह की प्रत्येक महिला प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये की आमदनी कर रही है। समूह की महिलाएं उत्पाद की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वे स्थानीय अधिकारियों से भी संपर्क कर रही हैं, ताकि उत्पाद को बड़े स्तर पर प्रचारित किया जा सके। समूह की अध्यक्ष अधिकारी देवी ने गठन के समय दिव्यांग महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी।
अन्य जनपदों तक पहुंचा उत्पाद
समूह द्वारा निर्मित हैंडवाश आज महदेइया, उतरौला, शुक्लागंज, चमरूपुर, पेहर व रेहरा बाजार के कई परिषदीय विद्यालयों में सप्लाई किया जा रहा है। इसके साथ ही गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच और सिद्धार्थनगर जैसे जनपदों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। गुणवत्ता और सस्ती कीमतों की वजह से यह उत्पाद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।