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Balrampur News: घर वापसी की खुशिया मातम में बदलीं, हर आंख रही नम

Fri, 14 Nov 2025 11:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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मुंबई से आए दानिश के चेहरे पर दिखी थी खुशी। - फोटो : चंदरखा बुजुर्ग में अधूरा पड़ा आयुर्वेदिक चिकित्सालय।
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बलरामपुर। मध्यप्रदेश के रतलाम में शुक्रवार सुबह हुए हादसे में शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। जिसने भी यह मनहूस खबर सुनी वह स्तब्ध रह गया। रेहरा बाजार थाना क्षेत्र के ऐलरा के मजरा जल्लहवा निवासी गुलाम रसूल मुंबई में रहकर (70) व्यवसाय करते थे। वह अपने बेटे खालिद व रिश्तेदार के साथ पांच नवंबर को शादी में शामिल होने के लिए सादुल्लाहनगर के जिगना गांव आए थे।
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कई दिनों तक चली शादी की रस्मों में पूरा परिवार जोश के साथ शामिल रहा। समारोह के खत्म होने के बाद 13 नवंबर की सुबह मुंबई और बड़ौदा के लिए उनकी वापसी तय हुई। गांव वालों ने दुआओं के साथ गुलाम रसूल समेत पांचों मेहमानों को विदा किया। सबको यह उम्मीद थी कि रास्ते में या गंतव्य पर पहुंचकर उनका फोन आएगा कि हम लोग सुरक्षित पहुंच गए हैं। गुलाम रसूल के करीबी रमजान ने कहा कि रसूल भाई ने फिर आने का वादा किया था लेकिन शुक्रवार को गांव में जो फोन आया, वह दर्दनाक संदेश लेकर था।

सूचना मिली कि दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। एसयूवी में सवार सभी की पांचों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सोचने तक की स्थिति नहीं रही।
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गांव के सलीम ने बताया कि खबर मिलते ही गांव में मानो समय थम सा गया हो। कुछ देर पहले तक जिनकी वापसी का इंतजार था, अब उन्हीं के लिए मातम की तैयारियां होने लगीं। शादी वाले घर जब यह मनहूस खबर पहुंची तो लोग गम में डूब गए। गांव की गलियों में सन्नाटा फैल गया। लोग अवाक होकर घरों के बाहर जमा होने लगे।

महिलाएं रोने लगीं और पूरा गांव सदमे में डूब गया। जिस परिवार को गांव के लोगाें ने हंसी-खुशी के साथ विदा किया था, अब उनके जाने की खबर मिलने पर सभी गम में डूबे हैं।

पहले अज्ञात में रतलाम पुलिस ने की कार्रवाई

हादसे के बाद मध्य प्रदेश के रतलाम पुलिस ने कार्रवाई अज्ञात के रूप में की। हादसे में मृतकों को निकाला और अज्ञात में दाखिल किया। बाद में सभी के आधार कार्ड मुंबई के मिले, जिसके बाद मूल निवासी होने की पुष्टि देर शाम हुई। इसके बाद सारी स्थिति साफ हो सकी। हादसा ऐसा था कि पूरी स्थिति स्पष्ट करने में मध्य प्रदेश प्रशासन भी जूझता रहा।
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