बलरामपुर। जिले की सड़कों पर 158 अनफिट स्कूली वाहन दौड़ रहे हैं। इन वाहनों से बच्चों को ढोने से हादसे की आशंका बनी रहती है। मगर स्कूल प्रबंधन इन वाहनों की फिटनेस नहीं करा रहे हैं। अन्य जनपदों में हो रहे हादसों से भी सबक नहीं लिया जा रहा है। एआरटीओ ने अनफिट वाहनों के संबंध में कई स्कूलों के प्रबंधन को नोटिस भेजा है। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही इन वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया तो इन वाहनों को सीज करके कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिले में कुल 167 प्राइवेट स्कूलों ने कुल 332 छोटे-बड़े स्कूली वाहनों का पंजीकरण संभागीय परिवहन विभाग में कराया है। इनमें मिनी बस, बस व टैक्सी आदि गाड़ियां शामिल हैं। बीते दो वर्षों में कोरोना महामारी के बीच स्कूल बंद होने से 158 वाहनों की फिटनेंस की वैद्यता समाप्त हो गई है। नए सत्र में सभी स्कूल फिर पूरी क्षमता के साथ संचालित किए जा रहे हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन ने 158 अनफिट वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र अभी तक नहीं लिया है। आलम ये है कि इन अनफिट वाहनों से ही स्कूली बच्चे ढोए जा रहे हैं। बीते दिन गाजियाबाद में हुए स्कूल बस हादसे से भी स्कूल प्रबंधन कोई सबक लेने को तैयार नहीं हैं। आलम ये है कि पंजीकृत स्कूली वाहनों के अलावा दर्जनों अन्य वाहन भी स्कूली बच्चों को गाड़ियों में भूसे की तरह भरकर ढो रहे हैं। ई-रिक्शा से भी तमाम बच्चे स्कूल भेजे जा रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाह दिख रहे हैं।
स्कूल वाहनों में जरूरी सामान
स्कूल वाहनों का रंग पीला होना चाहिए।
आगे व पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए।
आगे-पीछे स्कूल ऑन ड्यूटी लिखा होना चाहिए।
अधिकतम गति सीमा 40 किमी प्रति घंटे हो।
वाहन पर स्कूल का नाम व मोबाइल नंबर अंकित हो।
सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल लगी हो।
वाहन में आग बुझाने का उपकरण लगा हो।
वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स जरूर हो।
वाहन में स्कूल का एक सहायक हो।
वाहन के दरवाजे पर मजबूत लॉक लगा हो।
वाहन चालक के पास पांच वर्ष का अनुभव हो।
58 अनफिट स्कूल वाहनों के प्रबंधकों को नोटिस दिया गया है। एआरएम व सीओ सिटी के साथ स्कूल वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। शनिवार को दो स्कूल वाहनों का चालान किया गया है। फिटनेस न कराने वाले स्कूलों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए अनफिट स्कूल वाहन सीज किए जाएंगे। अरविंद यादव, एआरटीओ बलरामपुर