बलरामपुर। जिले के सभी ब्लॉकों में तैनात मनरेगा कर्मचारी श्रमिकों को गांवों में 100 दिन का रोजगार देने का खाका तैयार करें। विकास के साथ-साथ श्रमिकों को घर बैठे रोजगार दिलाने में भी मनरेगा योजना का अहम योगदान है। गांवों का तेजी से विकास कराने के लिए भारत सरकार की तरफ से पर्याप्त बजट दिया जा रहा है।
उच्चाधिकारियों की तरफ से प्रतिदिन गांवों में होने वाले मनेरगा कार्यों की मॉनीटरिंग की जा रही है। ये बातें शनिवार को डीसी मनरेगा महेन्द्र देव पांडेय ने विकास भवन स्थित डीपीआरसी में जिले के सभी नौ ब्लॉकों में तैनात अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों, तकनीकी सहायकों व कंप्यूटर आपरेटरों को एक दिवसीय प्रशिक्षण देते हुए कही।
शनिवार को मनरेगा योजना की कार्यवृत्ति तैयार करने में सहयोग करने वाले कर्मचारियों को तहसील स्तरीय तीन समूहों में बांटकर प्रशिक्षण दिया गया।
पहले समूह में उतरौला तहसील के ब्लॉक गैड़ास बुजुर्ग, रेहरा बाजार व उतरौला के कर्मी प्रशिक्षण में शामिल हुए। दूसरे समूह में तुलसीपुर तहसील के ब्लॉक गैसड़ी, पचपेड़वा व तुलसीपुर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। तीसरे समूह में सदर, श्रीदत्तगंज व हरैया सतघरवा ब्लॉक के मनरेगा कर्मचारियों को प्रशिक्षण में शामिल किया गया।
डीसी मनरेगा ने कहा कि श्रमिकों के जॉबकार्ड का नियमित परीक्षण करें, जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों को 100 का रोजगार मुहैया कराया जा सके। एनआरएम कार्यों के मैपिंग में कोई लापरवाही न बरती जाए।
मनरेगा योजना से गोशाला की क्षमता में वृद्धि करके छुट्टा जानवरों को रखने का इंतजाम कराएं। बारिश के बाद चकमार्ग के कार्यों को प्राथमिकता से कराया जाएगा। व्यक्तिगत लाभार्थी परक कार्यों को दो माह में पूरा कराना है।
तकनीकी सहायकों को प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक हजार से 1500 मानव दिवस सृजन करने वाले कार्यों का मैप चार दिन में तैयार करना होगा। प्रशिक्षण कार्यशाला के आयोजन में संतोष कुमार यादव का सराहनीय योगदान रहा।