लौकिया में आलू की फसल दिखाते नवनीत। -संवाद
रेहरा बाजार। युवा किसान नवनीत केले के साथ आलू की सहफसली खेती कर कर रहे हैं। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने इससे गांव के पांच ग्रामीणों को रोजगार भी दे रखा है। इस सफल सहफसली खेती से वह क्षेत्र के युवा किसानों की प्रेरणा बन गए हैं।
विकास खंड की ग्रामसभा लौकिया के युवा किसान नवनीत ने ग्रेजुएशन करने के बाद खेती में रोजगार के अवसर तलाशने के लिए आलू और केले की सहफसली खेती करना शुरू की। उन्होंने दो एकड़ में जी-9 प्रजाति के केले के साथ आलू की सहफसली खेती शुरू की। केले को पंक्तियों में लगाकर बीच में बची जमीन में आलू की बोआई की। केले की लागत में आलू की फसल भी तैयार हो जाती है। इसमें अतिरिक्त लागत नहीं लगती। आलू से मिली धनराशि से केले की फसल में खाद, दवा, मजदूरी आदि निकल जाती है। अलग से पैसा नहीं लगाना पड़ता है। उन्होंने गांव के अवधराम, लवकुश, जानकी देवी, जलेवादेवी व संगीता देवी को रोजगार दे रखा है। (संवाद)
18 महीने में होता है लाखों का मुनाफा
नवनीत ने बताया कि आलू इस समय तैयार है। 600 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा है। दो एकड़ में 800 क्विंटल आलू की पैदावार हो जाती है। इससे 4 लाख 80 हजार रुपये की आमदनी होगी। मजदूरी, खाद, दवा आदि में दो लाख रुपये खर्च होने के बाद दो लाख 80 हजार का मुनाफा हो जाता है। एडीओ कृषि रणधीर सिंह ने बताया कि केले व आलू की सहफसली करने से केले के फसल में अलग से लागत नहीं लगानी पड़ती। 18 महीने में केले की फसल तैयार होती है। बीच में खर्च की आवश्यकता को सहफसली से आसानी से पूराकर कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।