बलरामपुर। सुबह-सवेरे छोटे-छोटे बच्चे बस्ता टांगे, हंसते-खिलखिलाते अपने पुराने स्कूल की ओर फिर दौड़ेंगे। अब न स्कूल दूर होगा और न ही रास्ते में किसी प्रकार का डर। दरअसल 20 विद्यालयों के विलय का आदेश वापस हो गया है। अब बच्चे फिर से अपने नजदीकी स्कूल में पढ़ाई कर सकेंगे। बीते दिनों अमर उजाला ने अभियान चलाकर जिम्मेदारों को सोचने पर मजबूर किया। इससे बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर स्कूल विलय का बड़ा निर्णय वापस लिया गया।
बीते दिनों जिले में 57 परिषदीय विद्यालयों का विलय किया गया था। कई जगह अधिक दूरी, सुनसान रास्ते, जानवरों का खतरा, बाढ़ और अन्य कठिनाइयों के चलते बच्चे पढ़ाई छोड़ने लगे थे। अभिभावक भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थे। कुछ बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटने लगी थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीएसए शुभम शुक्ल ने बड़ा कदम उठाया और 20 विद्यालयों के विलय का आदेश वापस ले लिया। अब जिले में केवल 37 विद्यालयों का ही विलय किया जाएगा। सहायक शिक्षा निदेशक राम सागर पति त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि नया निर्णय बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा प्रभावित न हो।
कठिनाई से मिली राहत तो दिखी नई राह
हरैया बाजार के पास गैड़ास बुजुर्ग गांव विलय से सबसे ज्यादा प्रभावित था। यहां बच्चों को सुबह-सुबह चार किलोमीटर दूर सिवराजपुर जाना पड़ता था, जहां पहुंचने के लिए बीच में नदी पार करनी पड़ती थी। बरसात में यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता था। इसी तरह महदेइया बाजार गांव के दर्जनों बच्चे नए स्कूल तक जाने के लिए सुनसान जंगलनुमा रास्ता पार करते थे। कई बार अभिभावक खुद बच्चों को छोड़ने जाते, जिससे खेती-बाड़ी का काम भी प्रभावित हो रहा था। हरैया की गीता देवी ने बताया कि स्कूल बहुत दूर था, बेटी को रोज अकेले भेजने में डर लगता था। अब पुराने स्कूल में ही पढ़ाई करेगी, तो हम चैन से रहेंगे। कक्षा पांच के छात्र रिंकू ने कहा कि रास्ते में खेत और जंगल आते थे, कभी-कभी सांप-बिच्छू भी दिख जाते थे। अब स्कूल पास रहेगा तो हम रोज समय पर पहुंच पाएंगे।