बलरामपुर। जंगल से सटे 12 से अधिक गांवों में तेंदुए का आतंक जारी है। सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के बनकटवा व बरहवा रेंजों में बीते एक माह में छह से अधिक लोगों को तेंदुओं ने हमला कर घायल किया है। तेंदुओं ने अब तक 12 से अधिक पालतू मवेशियों को भी अपना निवाला बना लिया है। जंगल से सटे गांवों के ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों पर जंगली जानवरों से सुरक्षा में मदद न करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
हरैया थाना क्षेत्र के जंगल से सटे पिपरहवा गांव में 27 फरवरी की भोर में महिलाओं के साथ शौच के लिए खेत गई लीलावती(45) पर पहले से घात लगाए तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया। परिजनों ने घायल लीलावती का इलाज कराने के लिए संयुक्त जिला चिकित्सालय भिनगा श्रावस्ती में भर्ती कराया। वन रक्षक दूधनाथ ने तेंदुए के पदचिह्न होने की पुष्टि की है। तेंदुए के पदचिह्न की पुष्टि होने के बाद बरहवा/बनकटवा रेंजर राकेश कुमार सिंह ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिजड़ा लगाने की बात कही है।
ललिया थाना क्षेत्र के चनियाकोट गांव निवासी संतोष पांडेय ने बताया कि 26 फरवरी की शाम को वह घर से अकबरपुर कला गांव जा रहा था। अकबरपुर कला गांव के पास पहले से घात लगाए बैठे तेंदुए ने उनके ऊपर हमला कर हाथ जबड़े में दबोच लिया। शोर मचाने पर अकबरपुर कला गांव के लोगों ने पहुंचकर उसे बचाया और तेंदुए को जंगल की तरफ खदेड़ दिया।
हरैया थाना क्षेत्र के गुगौली कला गांव निवासी अश्वनी कुमार द्विवेदी ने बताया कि 25 फरवरी की रात उनके पशुशाला में तेंदुए ने हमला कर एक मवेशी को अपना निवाला बना लिया। पशुओं के चिल्लाने पर परिजन व ग्रामीणों ने टॉर्च की रोशनी जलाकर शोर मचाया और तेंदुए को जंगल की तरफ खदेड़ा गया।
जिले के तीन थाना क्षेत्रों में जंगल से करीब वाले 12 से अधिक गांवों में तेंदुओं को आतंक फैला हुआ है। हरैया थाना क्षेत्र के साथ ललिया व महराजगंज तराई के कई गांवों में तेंदुओं के आतंक से लोग भयभीत हैं। ग्रामीण राम कुमार, रवि कुमार, दिनेश कुमार, बुद्धि सागर अवस्थी, अरविंद, राजकरन मौर्य, रामधीरज, ओम प्रकाश, रामदयाल, जय पत्तर, राजितराम, रक्षाराम व संजय कुमार आदि ने वन विभाग के अफसरों पर मदद न करने का आरोप लगाया है। गांवों में अंधेरा होने के चलते रात के समय तेंदुए जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों में आ जाते हैं और लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि तेंदुए व अन्य जंगली जानवरों के हमलों से मौत के मामले में पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। चार लाख रुपये तत्काल दिए जाते हैं और एक लाख रुपये बाद में दिया जाता है। घायलों को डॉक्टर की रिपोर्ट में गंभीर होने पर एक लाख रुपये और मवेशियों के मौत पर पशुपालकों को मुआवजा देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जंगल से सटे गांवों के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। लोगों को सुरक्षा के संबंध में जागरूक भी किया जा रहा है।