बलरामपुर। अगर बस खाई में नहीं गिरी होती तो उसमें सवार कोई भी तीर्थयात्री जिंदा न बचता। आतंकवादी बस में सवार सभी लोगों को मौत के घाट उतारने की फिराक में थे, लेकिन बस के खाई में पलट जाने से यात्रियों की जान बच गई। बस के खाई में गिरने के बाद भी आतंकवादी 15 मिनट तक गोलियां बरसा रहे थे। यह दर्द आतंकी हमले में घायल हुए मधवाजोत गांव के निवासी संतोष कुमार वर्मा ने बलरामपुर पहुंचने के बाद बयां किया।
कहा कि वह बस में आगे चालक की सीट के बगल ही बैठे हुए थे। शिवखोड़ी से वापस आते समय जब बस एक मोड़ पर धीमी हुई तभी गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई पड़ने लगी। पहले तो समझ में ही नहीं आया। यह आवाज कैसी है और कहां से आ रही है। तभी बस के ठीक सामने मुंह पर नकाब डालें एक आतंकवादी दिखाई पड़ा जो बस को निशाना साधकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहा था। इसी बीच एक गोली चालक की कनपटी पर आकर लगी और बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। खाई में गिरने के बाद भी 15 मिनट तक कई आतंकवादी फायरिंग करते रहे।
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आंखों के सामने छा गया अंधेरा
- घायल शारदा देवी का कहना है कि वह अपने पति व बेटे के साथ एक ही सीट पर बैठी थी। एकाएक गोली चलने लगी। किसी की कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करें। ऐसे में एक गोली सीधा उनके बेटे को लगी। बेटे का खून देख वह बेहोश हो गई। जब होश आया तब तक उसका लाल जा चुका था।