श्रीदत्तगंज (बलरामपुर)। स्थानीय ब्लॉक के गोनकोट गांव के ग्रामीणों पर राप्ती नदी की कटान का कहर कभी भी टूट सकता है। राप्ती की कटान से भयभीत ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उतरौला एसडीएम अरुण कुमार गौड़ ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर कटान स्थल का मुआयना किया और ग्रामीणों को कटान से सुरक्षित रखने का भरोसा दिलाया। जिले के 34 गांवों में राप्ती नदी के अंधाधुंध कटान से तबाही का मंजर है। ग्रामीणों के खेतों को राप्ती नदी कटान करके निगल रही है।
डीडीसी पिपरी कोल्हुई चंद्र प्रकाश पांडेय ने सोमवार को गोनकोट गांव के ग्रामीण जमील, दुर्गा विश्वकर्मा, नेभू मौर्य, मनिक विश्वकर्मा, धनीराम, बुधराम, जगदंबा, श्याम सिंह, कल्लन, अजमल, संदीप व लालबाबू आदि से मुलाकात की और कटान से संबंधित समस्याओं के बारे में उनका हाल जाना। ग्रामीणों ने डीडीसी से बताया कि गोनकोट ग्रामीणों की जान आफत में आ चुकी है। राप्ती नदी का जलस्तर कम होने के बाद गांव के पास राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है।
15 दिन के अंदर नदी ने 200 मीटर कटान कर सड़क के किनारे पहुंच गई है। बाढ़ खंड के अधिकारियों की तरफ से फ्लड फाइटिंग का कार्य कराया जा रहा था। आधा अधूरा कार्य होने से फल्ड फाइटिंग को नदी की धारा बहा ले गई है। कटान इतनी तेज है कि एक दिन में नदी कई मीटर जमीनें काट रही है। राप्ती की कटान को देखकर गोनकोट के ग्रामीण भयभीत हैं।
डीडीसी ने चेतावनी दी कि यदि गांव को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। उधर मौके पर पहुंचे उतरौला एसडीएम ने भी ग्रामीणों से कटान के संबंध में जायजा लिया और कहा कि बाढ़ खंड के अधिकारियों को कटान स्थल पर फ्लड फाइटिंग का कार्य तेजी से कराने का निर्देश दिया गया है। जिससे गांव को राप्ती की कटान से बचाया जा सके। राप्ती नदी की अंधाधुंध कटान से जिले के 34 गांवों में तबाही का मंजर है। लोगों के बेशकीमती जमीनों को निगल रही है।
जमीनों को नदी की धारा में विलीन किसान वेबसी से देख रहे हैं। प्रशासन की तरफ से किया जा रहा प्रयास भी किसानों के जमीनों को कटान से नहीं बचा पा रहा है। कटान पीड़ित किसानों ने शासन-प्रशासन से नदी में समाहित हुए जमीनों का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व / जिला आपदा प्रभारी अरुण कुुमार शुक्ल ने बताया कि तीनों तहसीलों के एसडीएम को कटान स्थलों की निगरानी और बाढ़ खंड के अधिकारियों से कार्य कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। राजस्व निरीक्षकों व हल्का लेखपालों को भी कटान स्थलों पर तैनात किया गया है।