बलरामपुर में बना जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान।
बलरामपुर। जिले के गठन के बाद शिक्षक प्रशिक्षण की मजबूत व्यवस्था के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आज भी अपने सबसे बड़े मकसद से दूर है। भवन बने 21 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन मान्यता न मिलने के कारण यहां आज तक डीएलएड का एक भी बैच शुरू नहीं हो सका। विडंबना यह है कि बलरामपुर के लिए निर्धारित 100 डीएलएड सीटों के प्रशिक्षुओं को 70 किमी दूर गोंडा डायट में प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।
अब इस लंबे इंतजार पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 लागू होने के बाद नई व्यवस्था ने भी ब्रेक लगा दिया है। एनसीटीई ने पुरानी मान्यता प्रक्रिया को समाप्त करते हुए बलरामपुर डायट की फाइल वापस कर दी है। अब संस्थान तभी दोबारा आवेदन कर सकेगा, जब एनसीटीई नया पोर्टल और नई मान्यता प्रक्रिया शुरू करेगा। डायट भवन का निर्माण वर्ष 2005 में पूरा हो गया था। इसके बाद लगातार डीएलएड पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए प्रयास होते रहे, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो गई।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की सामान्य निकाय बैठक में यह निर्णय लिया कि एनईपी-2020 के अनुरूप नहीं होने वाले सभी लंबित आवेदन वापस कर दिए जाए। इसी निर्णय बाद एनसीटीई की उत्तरी क्षेत्रीय समिति ने बलरामपुर डायट की मान्यता संबंधी मूल फाइल भी लौटा दी। मान्यता न मिलने का सबसे बड़ा नुकसान जिले के युवाओं को उठाना पड़ रहा है। जिले के लिए निर्धारित 100 डीएलएड सीटों पर प्रवेश तो होता है, लेकिन इन सीटों का संचालन गोंडा के दर्जीकुआं डायट से किया जाता है।