सादुल्लाहनगर/महराजगंज तराई (बलरामपुर)। पोर्टल की सुस्ती से जिले के 2.50 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री फंस गई है। दिन में वेबसाइट पर प्रक्रिया पूरी करने के बाद मोबाइल नंबर पर ओटीपी रात में पहुंचता है। फार्मर रजिस्ट्री न कराने वाले किसानों की पीएम सम्मान निधि रुक सकती है। इसी डर से किसान रातभर जागकर जनसेवा केंद्रों पर फार्मर रजिस्ट्री करवा रहे हैं।
जिले में तीन लाख 16 हजार 356 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होनी है। अभी तक करीब 65 हजार किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो सकी है। प्रत्येक सीएससी पर रोजाना 150 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य प्रशासन ने रखा है। ऐसे में ठंड के बीच सुबह ही किसान जनसुविधा केंद्र पहुंच जाते हैं, लेकिन पोर्टल की सुस्ती के कारण बमुश्किल 10-15 फार्मर रजिस्ट्री ही हो पाती हैं। ऐसे में किसानों को लौटना पड़ता है। फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसानों के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। यह ओटीपी काफी देर बाद आता है। इससे किसान सीएससी पर ही खड़े रहते हैं। कई बार ओटीपी तब आता है, जब किसान रात में खेत पर अपनी फसल की रखवाली कर रहे होते हैं। इस वजह से फार्मर रजिस्ट्री का काम पिछड़ रहा है।
19 जनवरी को आ सकती है सम्मान निधि की किस्त
फार्मर रजिस्ट्री न हो पाने की दशा में सम्मान निधि का लाभ न मिलने की आशंका से किसान परेशान हैं। सम्मान निधि की अगली किस्त 19 जनवरी को आ सकती है। वहीं, अब तक मात्र 20 प्रतिशत किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो सकी है। किसानों ने मांग की है कि सरकार को इस बार की सम्मान निधि के लिए फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता खत्म करनी चाहिए।
रातभर लगी रहती है किसानाें की भीड़
सादुल्लाहनगर बाजार में स्थित सीएससी में रातभर भीड़ रहती है। रात 11 बजे जनसेवा केंद्र पर खड़े किसान अखिलेश चौहान, विजय व इरफान ने बताया कि चार-पांच बार जनसेवा केंद्र आ चुके हैं, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पाई।
प्रतिदिन लगा रहे केंद्र का चक्कर
महराजगंज तराई जनसेवा केंद्र में रात 11.20 बजे फार्मर रजिस्ट्री करवाने आए राज बहादुर, फजल मोहम्मद व गोबरे ने बताया कि आठ दिन से रोज सीएससी आते हैं, लेकिन पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। रात में गेहूं की रखवाली के लिए चले जाते हैं। इस वजह से नींद भी पूरी नहीं हो पा रही।
फार्मर रजिस्ट्री में तेजी के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। कई सीएससी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। कुछ जगहों पर दिक्कत आ रही है। प्रयास किया जा रहा है कि समय से काम पूरा कर लिया जाए।
- नरेंद्र कुमार, उप कृषि निदेशक