फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Balrampur News: माइक्रोस्कोप के बिना आंखों का ऑपरेशन ठप, लौट रहे मरीज

Mon, 10 Aug 2026 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
विज्ञापन
फोटो-6-बलरामपुर के जिला मेमोरियल अस्पताल में इलाज करते चिकित्सक ।-संवाद
विज्ञापन
बलरामपुर। जिला मेमोरियल अस्पताल के नेत्र विभाग में माइक्रोस्कोप की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। इसके अभाव में नेत्र विभाग में कई महीनों से ऑपरेशन बंद पड़े हैं। प्रतिदिन मोतियाबिंद समेत अन्य छोटे-बड़े ऑपरेशन की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले पांच से 10 मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल होने के कारण यहां आंखों से संबंधित समस्याओं को लेकर प्रतिदिन औसतन 70 से 80 मरीज पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग मरीजों में मोतियाबिंद की समस्या अधिक देखने को मिलती है। चिकित्सक जांच के बाद कई मरीजों को ऑपरेशन की सलाह देते हैं, लेकिन नेत्र विभाग की ऑपरेशन थियेटर (ओटी) में माइक्रोस्कोप उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाहर से उपचार कराने की सलाह दी जा रही है।
सोमवार को ओपीडी में पहुंचीं खातूना ने बताया कि उनकी मां का मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है, लेकिन अस्पताल में सुविधा नहीं होने से अब उन्हें बाहर जाना पड़ेगा। वहीं, राघव और रमेश ने बताया कि माइक्रोस्कोप होने से आंखों की जांच और ऑपरेशन की सुविधा बेहतर हो सकती है।
विज्ञापन

नेत्र सर्जन डॉ. चंद्रभान यादव ने बताया कि माइक्रोस्कोप उपलब्ध कराने के लिए सीएमएस के माध्यम से कई बार पत्र भेजा जा चुका है। उपकरण मिलने के बाद मरीजों के ऑपरेशन दोबारा शुरू किए जा सकेंगे।
दो नेत्र सर्जन तैनात, संसाधनों का अभाव
शासन स्तर से जिला मेमोरियल अस्पताल में दो नेत्र सर्जनों की तैनाती है। डॉ. प्रदीप चौधरी और डॉ. चंद्रभान यादव मरीजों को ओपीडी में सेवाएं दे रहे हैं। ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने के कारण दोनों चिकित्सक सप्ताह में तीन-तीन दिन ओपीडी में मरीज देखते हैं।
नगर के सिविल लाइन निवासी अशोक प्रताप और बब्बू सिंह ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक तो हैं, लेकिन जरूरी संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी राहत मिल सकती है।
प्रशिक्षण का भी नहीं मिल पा रहा लाभ
नेत्र रोग सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार ने स्माल इंसीजन कैटरेक्ट सर्जरी (एसआईसीएस) यानी छोटे चीरे से मोतियाबिंद ऑपरेशन की विशेष ट्रेनिंग ली है। उन्होंने रायपुर में दो माह का प्रशिक्षण प्राप्त किया था, लेकिन अस्पताल में आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके प्रशिक्षण का लाभ स्थानीय मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें