विश्व एड्स दिवस
बलरामपुर। तराई क्षेत्र में एचआईवी संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है। जिले में 2015 से अब तक 2306 व्यक्ति एचआईवी एड्स बीमारी से ग्रसित मिल चुके हैं। इनमें से वर्तमान समय में 1283 एड्स रोगियों का इलाज चल रहा है। अगर साल 2024 की बात करें तो जनवरी से 30 नवंबर तक 85 एचआईवी पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। यानि प्रतिमाह 8.92 एचआईवी पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं। वहीं वर्ष 2023 में 120 संक्रमित मरीज मिले चुके हैं।
पूरे विश्व में एक दिसंबर यानि आज विश्व एड्स दिवस मनाया जा रहा है। इस दौरान जिले में भी संक्रमण से बचने के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) वह वायरस है, जो एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) का कारण बनता है। जब कोई व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित होता है, तो वायरस हमला करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। जैसे-जैसे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जाती है, व्यक्ति में जानलेवा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। एड्स रोगियों के इलाज की सुविधा के लिए जिला मेमोरियल चिकित्सालय स्थित एआरटी सेंटर का संचालन हो रहा है। यहां पर रोगियों को दवा सहित अन्य तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रत्येक वर्ष एक दिसंबर को विश्व स्तर पर एड्स दिवस मनाया जाता है। यह दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य एचआईवी संक्रमण से एड्स महामारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही गैर सरकारी संगठन भी एड्स की रोकथाम और नियंत्रण पर काम कर रही है।
इन कारणों से फैलता है एड्स
एसीएमओ डॉ. एसके श्रीवास्तव ने बताया कि एड्स बीमारी एक-दूसरे में फैलने के कई कारण हैं। गर्भवती महिला अपने साझा रक्त परिसंचरण के माध्यम से अपने भ्रूण में वायरस फैला सकती है, या स्तनपान कराने वाली मां अपने स्तन के दूध के माध्यम से इसे अपने बच्चे तक पहुंचा सकती है। इसके अलावा असुरक्षित तरीके से एचआईवी ग्रसित व्यक्ति संपर्क में आने व नशीली दवाओं का उपयोग करना तथा सुई या सिरिंज साझा करने से भी यह संक्रमण फैल सकता है।
इन कारणों से नहीं फैलता है एड्स
मच्छर या पालतू जानवर के काटने
एड्स संक्रमित मरीजों के साथ खेलने से
वायरस से संक्रमित व्यक्ति की छुई गई वस्तुओं को छूने से
एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति द्वारा हाथ में लिया गया भोजन खाने से
फैक्ट फाइल
- अब तक पंजीकृत मरीज - 2306
- वर्तमान में इलाज करा रहे मरीज - 1283
- पुरुष मरीज - 577
- महिला मरीज - 706