बलरामपुर। परिषदीय विद्यालयों में संचालित बालवाटिका और को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को अब खेल-खेल में पढ़ाई का नया अनुभव मिलेगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने तीन से छह वर्ष तक के बच्चों की भाषा, अंक और कला दक्षता बढ़ाने के लिए कदम, कलांकुर और चहक नाम की नई अभ्यास पुस्तिकाएं जिलों में भेजनी शुरू कर दी हैं। एक जुलाई से इन्हें बच्चों को उपलब्ध कराया जाएगा।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से तैयार इन पुस्तिकाओं का उद्देश्य छोटे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना है। पुस्तिकाओं में बच्चों की समझ और रुचि के अनुसार चित्र, गतिविधियां और सरल अभ्यास शामिल किए गए हैं, ताकि बच्चे बोझ महसूस किए बिना आसानी से सीख सकें। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए केवल अभ्यास पुस्तिकाएं ही नहीं, बल्कि 12 प्रकार की बड़ी पुस्तकें और समग्र प्रगति रिपोर्ट भी तैयार की गई हैं। इसके माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत बच्चों को बोलने, समझने, गिनती पहचानने और रचनात्मक गतिविधियों में दक्ष बनाने पर विशेष जोर रहेगा। इसके तहत चहक एक पुस्तक 12,752, चहक दो 8490, चहक तीन व कदम 6041 के साथ ही 27281 कलांकुर पुस्तक भेजी गई है। इसके साथ ही 4608 बिगबुक व 384 टीचर गाइड वितरित की जानी है। इसके साथ ही तालिका आदि भी केंद्रों को मिलेगी। जिससे नौनिहालों को बेहतर ढंग से पढ़ाया जा सके। बीएसए शुभम शुक्ल ने बताया कि नई पुस्तिकाएं बच्चों की शुरुआती शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बनाएंगी। इससे बालवाटिका और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों की सीखने की नींव और मजबूत होगी।