बलरामपुर। शासन ने जिले के 455 राजस्व गांवों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन के लिए 27.81 करोड़ रुपये का बजट एक बार फिर जारी कर दिया है। गांवों में बजट आवंटन की कार्यवाही शुरू होने के बाद अब ठोस व तरल कचरा प्रबंधन में तेजी आएगी। करीब 14.50 लाख से अधिक ग्रामीणों को गंदगी से निजात मिलेगी।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में विकास खंड सदर में 74, गैंड़ास बुजुर्ग में 18, गैंसड़ी में 60, हरैया सतघरवा में 68, पचपेड़वा में 55, रेहरा बाजार में 46, श्रीदत्तगंज में 33, तुलसीपुर में 70 व उतरौला में 31 राजस्व ग्रामों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन के कार्य मंजूर किए गए थे। पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांव में 705 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च करना था। इसमें ठोस कचरा प्रबंधन के लिए 45 रुपये और तरल कचरा प्रबंधन के लिए 660 रुपये खर्च करने का प्रावधान है।
पांच हजार से कम आबादी के गांवों में 340 रुपये प्रति व्यक्ति बजट निर्धारित है। इसमें ठोस कचरा प्रबंधन पर 60 रुपये व तरल प्रबंधन पर 280 रुपये खर्च करना निर्धारित है। इस प्रकार गांवों में कचरा प्रबंधन पर कुल 82.27 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है।
इसमें स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण से 38.76 करोड़ और मनरेगा से 43.50 करोड़ रुपये का व्यय होना है। बीते वित्तीय वर्ष में मिशन से आवंटित बजट में से 10.84 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 27.81 करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े थे। सूत्रों के मुताबिक शासन ने सरेंडर किए गए बजट को फिर जारी कर दिया है। मुख्य विकास अधिकारी संजीव कुमार मौर्य का कहना है कि ठोस व तरल कचरा प्रबंधन का सरेंडर बजट वापस मिल गया है। डीपीआरओ श्रेया उपाध्याय को चयनित सभी राजस्व गांवों में बजट आवंटित करने का निर्देश दिए हैं।
इन पर होंगे कार्य : सभी राजस्व गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए खाद गड्ढा, कंपोस्ट पिट, बायोगैस प्लांट, कचरा पात्र, प्लास्टिक बैंक निर्माण किया जाएगा। कचरा वाहन साइकिल व ई-रिक्शा खरीदे जाएंगे। स्वच्छता किट में ड्रेस, फावड़ा, साबुन, ग्लब्स और टोपी खरीदी जाएंगी। तरल कचरा प्रबंधन के लिए सोकपिट, नालियों पर सिल्ट कैचर, तालाबों व जलाशयों पर फिल्टर चैंबर, तालाबाें के सौंदर्यीकरण, यू टाइप व भूमिगत नाली, हैंडपंप प्लेटफार्म और किचन गार्डन बनाए जाएंगे।