बलरामपुर। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 01 फरवरी से शुरू विश्व पुस्तक मेला-2025 में बलरामपुर के साहित्यकारों व अदीबों की धूम है। कई प्रकाशक के स्टॉल पर जिले के शायरों, कवियों व लेखकों की पुस्तकें अपनी अलग ही छाप छोड़ रही हैं। इससे जिले के लेखक एक बार फिर चर्चा में हैं। पुस्तक मेला 09 फरवरी तक चलेगा।
पुस्तक मेले में शहर के कहानीकार प्रदीप मिश्र की ''अटल का बलरामपुर'' लोगों की पसंद बनी है। पूर्व प्रधानमंत्री को पहली बार लोकसभा में पहुंचाने वाले क्षेत्र बलरामपुर के जनमानस में बसी अटल की यादों की कहानी यह किताब सुनाती है। जबकि शांति व अहिंसा का संदेश देती युवा कवि कुमार अनुपम की नवीनतम पुस्तक ''युद्ध के विरुद्ध'' चार खंडों में स्टॉल पर मौजूद है। बलरामपुर के मूल निवासी व शिवपुरी में राजनीति विज्ञान के शिक्षक प्रो. पुनीत कुमार की पांचवीं किताब ''भारतवर्ष में मानव अधिकार'', अली सरदार जाफरी के भतीजे व कहानीकार जाफर मेहदी जाफरी की लघु कहानियों का संग्रह ''सुबह कितनी दूर'' भी मेले में है।
रामपाल श्रीवास्तव के आलेख संग्रह व संस्मरण की चार किताबें सफेद हाथी, बचे हुए पृष्ठ, जित देखूं तित लाल व संपादाकाचार्य बाबूराव विष्णु पराड़कर, उपन्यास ''त्राहिमाम युगे युगे'' बलरामपुर की माटी की सुगंध बिखेर रही है। बलरामपुर के बाशिंदे व मुंबई में काम कर रहे अखलाक अहमद जई की किताबें मामक सार (उपन्यास), सोख्ता (उपन्यास), हरकारा (पत्र संग्रह), पढ़ा-लिखा इंसान (बाल कहानी संग्रह), लालटेनगंज (कहानी संग्रह ) भी उपलब्ध है। शायर डॉ. अब्दुल सुबहान खान उर्फ शाद बलरामपुरी की पुस्तक ''अंजाम-ए-इश्क़'' भी लोगों को पसंद आ रही है। (संवाद)
साहित्य में जिले के लोगों की अलग ही है पहचान
बलरामपुर की धरती के अदीबों में जहां नानक चंद ''इशरत'', अली सरदार जाफरी, पद्मश्री एवं बेकल उत्साही, पं. देवी प्रसाद राही, पी. पयाम, प्रो. उदयभानु पांडेय, ईश्वर सरन ''सरन'', हरिशंकर लाल श्रीवास्तव ''खिज्र'', कंट्रोल बलरामपुरी, बम बहादुर सिंह ''सरस'', डॉ. अंजुम इरफानी, डॉ. कलीम कैसर, डॉ. अनिल गौड़ जैसे प्रतिष्ठित नाम शुमार हैं। वहीं नए लेखकों, कवियों व कहानीकारों की भी लंबी फेहरिस्त है। इस बार दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में भी जिले के लेखकों की धमक दिख रही है।