बलरामपुर। अल्लाह ने सभी मुस्लिम पर रोजा रखना फर्ज किया है। रोजा रखने के साथ ही पांचों वक्त की नमाज और अल्लाह की इबादत करने वालों की सभी नेक दुआएं कुबूल होती हैं। अल्लाह रमजान माह में अपने बंदों द्वारा की गई एक नेकी के बदले 70 नेकियों का सवाब देता है। यह बात मुकद्दस माह रमजान की अहमियत बताते हुए मदरसा दारुल उलूम इमामे आज़म लिलबनात के प्रबंधक मौलाना मोहम्मद उमर ने कही।
बताया कि सभी मुस्लिम भाई बहन को अपने जान माल का सदका और जकात निकालकर गरीबों और मजबूरों की मदद करनी चाहिए। अल्लाह ने इस मुकद्दस महीने को तीन (अशरा) हिस्सों में बांटा है। एक से दस रोजे को रहमत, ग्यारह से बीस रोजे को मगफिरत और इक्कीस से तीस रोजे को जहन्नुम से निजात कहा गया है। बताया कि रमजान का तीसरा और अंतिम अशरा जहन्नुम से निजात दिलाने का दौर शुरू हो गया है। यह अशरा इबादत व तिलावत का है, इसलिए रोजा रखकर इधर-उधर ना बैठें। मस्जिद या घर पर कुरान-ए-पाक की तिलावत करके अल्लाह से अपने और परिवार द्वारा किए गए गुनाहों की माफी जरूर मांगें। अल्लाह अपने नेक बंदों को जरूर माफ कर देगा।