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बिना मरीज फर्राटा भरती रहीं एंबुलेंस

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बलरामपुर। अधिक पैसे का भुगतान कराने के चक्कर में बिना मरीज बैठाए ही एंबुलेंस गांव व अस्पताल का चक्कर लगा रही है। विभागीय जांच में अब तक 250 से अधिक केस फर्जी मिल चुके हैं। फर्जी संचालन पर विभाग का शिकंजा कसने पर एंबुलेंस संचालक सतर्क हो गए हैं। एंबुलेंस में जीपीएस का तोड़ भी कंपनी के अधिकारी निकाल लिए हैं। एंबुलेंस को एक जिले से दूसरे जिले में सैर सपाटे के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। मामला उजागर होने पर कार्रवाई कर दी जाती है, नहीं तो फर्जी बिल लगा भुगतान करा दिया जाता है।
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गत दिनों स्टाफ नर्स को अयोध्या घुमाने के लिए फर्जी रेफर केस बनाकर एंबुलेंस से अयोध्या सैर-सपाटे पर ले जाया गया। वहां पर किसी ने एंबुलेंस का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसी तरह का एक मामला बीते दिन बहराइच में देखने को मिला था। बलरामपुर के एंबुलेंस से बहराइच लकड़ी की चौकी (तख्त) पहुंचाया गया था। बहराइच में ग्रामीणों ने एंबुलेंस को पकड़ लिया और हंगामा किया। मामले ने तूल पकड़ा तो एंबुलेंस कर्मी पर कार्रवाई हुई।
उतरौला में ही फर्जी मिले एंबुलेंस के 124 फेरे
एंबुलेंस संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह का कहना है कि कर्मियों को मरीजों को लाने व ले जाने का टारगेट दिया जाता है। टारगेट को पूरा करने की जिम्मेदारी एंबुलेंस कर्मियों की होती है। जिले में बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। मामला जब खुलता है तो कर्मियों पर कार्रवाई कर कंपनी अपना पल्ला झाड़ लेती है। जांच में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उतरौला में 108 सेवा के 64 व 102 सेवा के 80 केस फर्जी पाए गए हैं। पचपेड़वा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 55 केस फर्जी मिले हैं। तुलसीपुर में एक ही मोबाइल नंबर से 35 बार एंबुलेंस बुलाई गई। रेहरा बाजार में 60 केेस फर्जी मिले हैं। इन मरीजों के दिए मोबाइल नंबर पर फोन करने पर पता चला कि यह मरीज कभी एंबुलेंस से अस्पताल आए ही नहीं थे लेकिन उनका नाम एंबुलेंस लाभार्थियों की सूची में दर्ज हो गया है। (संवाद)
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अधीक्षकों से मांगी गई है रिपोर्ट : जिले के सभी सीएचसी अधीक्षकों से एंबुलेंस संचालन के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। फर्जी संचालन पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ बलरामपुर
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