बलरामपुर। कृषि यंत्र अनुदान मामले की जांच अब सिर्फ गायब कृषि यंत्रों तक सीमित नहीं रह गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ अब उन अधिकारियों और व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनकी जिम्मेदारी योजना की निगरानी और सत्यापन की थी। माना जा रहा है कि जांच का दायरा संबंधित ग्राम पंचायतों के साथ-साथ निरीक्षण करने वाले अधिकारियों तक भी पहुंच सकता है।
2021 में बलरामपुर देहात, अरनहवा, बलदेव नगर और धनघटा समेत छह ग्राम पंचायतों को कृषि यंत्र बैंक स्थापित करने के लिए करीब 16 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था। इसका उद्देश्य किसानों को सामुदायिक स्तर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराना था।
वर्ष 2025 में जांच शुरू होने पर कई अनियमितताएं सामने आईं। संबंधित ग्राम पंचायतों से कृषि यंत्रों की खरीद के बिल, वाउचर और अन्य अभिलेख मांगे गए। जांच में पता चला कि छह में से केवल दो ग्राम पंचायतें ही खरीद के दस्तावेज उपलब्ध करा सकीं, जबकि चार पंचायतें कोई संतोषजनक रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकीं।
इसके बाद अमेठी से आई सत्यापन टीम और भूमि संरक्षण विभाग ने मौके पर जांच की, लेकिन संबंधित स्थानों पर कृषि यंत्र नहीं मिले। इस मामले में तत्कालीन और वर्तमान पंचायत सचिवों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कृषि यंत्र बैंक कभी बने ही नहीं या बाद में गायब हो गए, तो चार वर्षों तक इसकी जानकारी प्रशासनिक तंत्र को क्यों नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि संबंधित वर्षों में निरीक्षण किसने किया, निरीक्षण रिपोर्ट में क्या दर्ज किया गया और योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई। यदि अभिलेखों और मौके की स्थिति में अंतर पाया गया तो जिम्मेदारी का दायरा और बढ़ सकता है। उपनिदेशक श्याम नारायण राम ने पूरे मामले की रिपोर्ट जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजते हुए विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की है।