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Balrampur News: सीएचसी से निजी अस्पताल भेजी गई गर्भवती, मौत

Thu, 25 Jun 2026 11:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर के सादुल्लाहनगर में जुटी लोगों की भीड़।
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बलरामपुर। रेहरा बाजार क्षेत्र में नौ माह की गर्भवती महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। परिजनों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेहरा बाजार व सादुल्लानगर पहुंचने पर महिला को समुचित उपचार नहीं मिला।
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आरोप है कि अस्पताल में मरीज की एंट्री तक नहीं की गई और उसे वहीं तैनात एक चिकित्सक से जुड़े निजी अस्पताल में भेज दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निजी अस्पताल को सील कर दिया है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू हो गई है।


मामला सादुल्लानगर थाना क्षेत्र के खानपुर गांव की ममता देवी से जुड़ा है। महिला के पति अनिल कुमार के अनुसार ममता नौ माह की गर्भवती थीं और शरीर में अत्यधिक सूजन आने पर उन्हें 24 जून को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। आरोप है कि वहां सीएचसी सादुल्लाहनगर में एक चिकित्सक ने प्राथमिक परीक्षण के बाद उन्हें किसी उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान में रेफर करने के बजाय सादुल्लानगर स्थित एचएफ हेल्थ केयर अस्पताल भेज दिया। वहां इलाज शुरू किया गया।
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बृहस्पतिवार को महिला को ग्लूकोज चढ़ाया गया और इंजेक्शन लगाए गए। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही प्रसव हो जाएगा, लेकिन करीब एक घंटे बाद ममता की हालत अचानक बिगड़ने लगी। पति के मुताबिक उसके मुंह से झाग निकलने लगा और स्थिति गंभीर हो गई। आरोप है कि इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने महिला को तत्काल सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया। परिजन आननफानन में ममता को फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।

वहां से पत्नी को फिर एंबुलेंस के जरिये घर भेजा गया, लेकिन रास्ते में शहजौरा के पास पहुंचते ही पत्नी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे ने दम तोड़ दिया। एक ही पल में परिवार ने मां और अजन्मे बच्चे दोनों को खो दिया। प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र वर्मा ने बताया कि परिजनों को समझाकर शांत कराया गया है। मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।


पंजीकरण समाप्त होने के बाद भी चल रहा था निजी अस्पताल
महिला की मृत्यु के बाद सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार एचएफ हेल्थ केयर अस्पताल का पंजीकरण बीती 30 अप्रैल के बाद प्रभावी नहीं था। अस्पताल अनधिकृत रूप से संचालित हो रहा था। इसी के कारण बृहस्पतिवार को सील करने की कार्रवाई की गई। अस्पताल के संचालन में रिजवान, मोहम्मद राशिद और जुबैदा खातून के नाम सामने आए हैं। जबकि आरोप यह भी है कि इसका संचालन सीएचसी में तैनात एक आयुष चिकित्सक से जुड़ा हुआ है। मामले की छानबीन हो रही है।


सीएमओ ने बनाई जांच समिति

मामला तूल पकड़ने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर जांच समिति गठित की गई है। जांच की जिम्मेदारी एसीएमओ डॉ. बीपी सिंह को सौंपी गई है। जांच अधिकारी ने बताया कि गर्भवती को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजे जाने की परिस्थितियों, उपचार प्रक्रिया तथा मृत्यु से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। संबंधित चिकित्सकों, कर्मचारियों और अन्य पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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