बलरामपुर/गैसड़ी। पहाड़ी नालों की बाढ़ में पचपेड़वा ब्लॉक के 30 से अधिक गांव हर वर्ष डूब जाते हैं। सोहेलवा जंगल से निकले मनोरमा व छिवली पहाड़ी नाले बरसात में जमकर तबाही मचाते हैं। गांवों और पहाड़ी नालों के बीच तटबंध का निर्माण होने पर ही समस्या दूर होगी। यदि बरसात से पहले तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया तो गांवों पर बाढ़ का कहर टूटेगा। ग्रामीणों को बरसात से पहले बाढ़ से बचाव के इंतजाम का इंतजार है।
सोहेलवा जंगल से निकले मनोरमा व छिवली पहाड़ी नाले हर वर्ष तबाही मचाते हैं। बूढ़ी राप्ती नदी की बाढ़ से दोनों पहाड़ी नालाें में उफान आता है। ग्रामीण अजय, दिलीप, दिनेश व मनीराम का कहना है कि दोनों पहाड़ी नालों में बाढ़ आने पर हर वर्ष पचपेड़वा ब्लॉक के मल्दा, मधवानगर खादर, इमिलिया खादर, पिपरिहा, जमुनी, पजोहा, भगवानपुर खादर, कटैयाभारी, बसंतपुर, मद्यनगर, सकलदा, लैबुड़वा, त्रिलोकपुर व सतनी सहित 30 से अधिक गांव जलमग्न हो जाते हैं।
बाढ़ के दौरान गांवों का संपर्क कट जाता है, गांव टापू बन जाते हैं। बाढ़ से घिरे ग्रामीणों का जिला, तहसील व ब्लॉक मुख्यालयों से संपर्क कट जाता है। बाढ़ में दो हजार बीघे से अधिक फसल तबाह हो जाती है। धान, अरहर, मक्का व उड़द की पैदावार भी नहीं हो पाती है। बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को रबी की फसलों पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि बरसात से पहले मनोरमा व छिवली पहाड़ी नाले के पास तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया तो गांवों के लोगों को दोनों पहाड़ी नालों के बाढ़ का कहर झेलना पड़ेगा। (संवाद)
कई बार की गई तटबंध निर्माण की मांग
ग्रामीण बताते हैं कि मनोरमा व छिवली पहाड़ी नाले के किनारे तटबंध का निर्माण कराने के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन अभी तक कवायद शुरू नहीं की जा सकी है। यदि बरसात से पहले तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया तो गांवों पर पहाड़ी नालों के बाढ़ का कहर टूटेगा।
तटबंध निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश
मनोरमा व छिवली पहाड़ी नाले के किनारे ग्रामीणों ने तटबंध निर्माण कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। बाढ़ खंड के इंजीनियरों को तटबंध निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश दिया गया है। बजट मिलने पर तटबंध का निर्माण शुरू कराया जाएगा। -अभय कुमार सिंह, एसडीएम तुलसीपुर