बैरिया। शिवाल स्थित कटानरोधी कार्य के बगल में विगत 10 दिनों से सरयू नदी की लहरों से हो रही कटान को रोकने के लिए बाढ़ विभाग ने फ्लड फाइटिंग योजना के अंतर्गत 150 मीटर लंबा जियोट्यूब विधि से कार्य शुरू कर दिया है। इसके तहत बोरियों में बालू और मिट्टी भरकर कटान रोकने का प्रयास होगा।
जबकि गोपालनगर टाड़ी में कटानरोधी कार्य से 100 मीटर उत्तर व दक्षिण दोनों कटानरोधी कार्य के बीच हो रही कटान का रुख अब बस्ती की ओर हो गया है। हालांकि फिलहाल सरयू नदी घटाव पर है। बाढ़ का पानी बढ़ाव पर हुआ तो तबाही सुनिश्चित है, लेकिन अब तक गोपालनगर टाड़ी स्थित दोनों जगह हो रही कटान को रोकने के लिए बाढ़ विभाग के द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हैं।
बता दें की शिवाल व गोपालनगर टाड़ी में करीब 10 से गेम्प्लर बनाकर कटानरोधी कार्य किया गया, लेकिन शिवाल में कटानरोधी कार्य के बगल से ही सरयू नदी कटान शुरू कर दिया। इसके तीन दिन बाद ही गोपालनगर टाड़ी में दो जगहों पर सरयू नदी उपजाऊ भूमि को निगलते हुए बस्ती के तरफ रुख कर लिया। ऐसे में कटान पीड़ित सहमे हुए हैं। तटवर्ती लोगों का कहना है कि फिलहाल तो जलस्तर में घटाव है, लेकिन नदी उफान पर आएगी तो तबाही शुरू कर देगी।
पिछले दिनों सांसद सनातन पाण्डेय व अधिशासी अभियंता संजय मिश्र ने मौके का निरीक्षण किया था। उस दौरान जहां सांसद ने तीनों कटान स्थलों पर 200-200 मीटर जियोट्यूब विधि से कटानरोधी कार्य कराने को कहा, लेकिन अधिशासी अभियंता ने सिर्फ शिवाल में 150 मीटर जियोट्यूब विधि से कटानरोधी कार्य कराने का आदेश मातहतों को दिया है। जिसके क्रम में बृहस्पतिवार को शिवाल में 150 मीटर जियोट्यूब विधि से कटानरोधी कार्य शुरू हो गया। जबकि गोपालनगर टाड़ी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है।
इस बाबत एसडीओ आकाश यादव ने कहा गोपालनगर के लिए अभी कोई आदेश नहीं हुआ है, अगर आदेश हुआ तो कार्य कराया जाएगा।
तीन सेमी प्रतिघंटे बढ़ रहा गंगा का जलस्तर
गंगा व सरयू जैसी बढ़ी नदियों के बीच घिरे जिले में बाढ़ की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सरयू नदी का जल स्तर बढ़ने के साथ ही बृहस्पतिवार को घटाव पर था लेकिन गंगा का जलस्तर तीन सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रही है। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट गेज के अनुसार शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 54.110 सेमी दर्ज किया गया। साथ ही 3 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। यहां वार्निंग लेबल 56.615 मीटर, खतरा बिन्दु 57.615 मीटर व मीडियम फ्लड लेबल 58.615 मीटर है।