फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

43 के बजाय आठ चिकित्सक के भरोसे महिला चिकित्सालय

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। करीब 36 लाख की आबादी वाले बलिया जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी बेहतर नहीं हैं। यहां एक तरफ जहां अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है तो दूसरी ओर अस्पतालों में संसाधनों का भी अभाव बना हुआ है। जिला महिला चिकित्सालय की बात की जाए तो जिला महिला चिकित्सालय में 64 बेड संचालित हो रहे हैं। जिसके सापेक्ष 13 चिकित्सक होने चाहिए। लेकिन महिला चिकित्सालय में सीएमएस को लेकर तीन चिकित्सक ही स्थायी रूप से तैनात हैं। इसके अलावा चार डॉक्टर परार्मशीय है। इस प्रकार कुल आठ चिकित्सक तैनात हैं।
विज्ञापन

वर्तमान में केएमसी, डीएचडब्लू, एसएनसीयू, एमसीएच को मिलाकर कुल 43 चिकित्सकों का मानक है। लेकिन सीएमएस को लेकर कुल सात चिकित्सक ही तैनात हैं। जबकि वर्तमान में पांच फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन समेत कुल 50 स्टाफ तैनात है। इसमें कंगारू मदर केयर (केएमसी) के एक डाक्टर व मातृ शिशु कल्याण के छह फार्मासिस्ट भी शामिल है। जबकि कोविड के चलते कोविड वार्ड, समेत अन्य वार्ड बनाए गए हैं। जिनकी देखभाल सात चिकित्सकों के भरोसे है। सुविधाओं की बात की जाए तो यहां आईसीयू वार्ड नहीं है, न ही उच्च स्तरीय तकनीकी मशीन है। कुछ मशीन है भी तो उसका स्पेशलिस्ट नहीं है। ओपीडी में प्रतिदिन एक चिकित्सक को करीब 150 मरीजों को देखना पड़ता है। जिसमें सोमवार और शनिवार को तो और भीड़ बढ़ जाती है। महिला चिकित्सालय के आंकड़ों पर गौर करें तो महीने में करीब 600 से 700 सामान्य डिलेवरी तथा करीब 25 से 30 सीजर से डिलेवरी कराई जाती है। अगर मानक के अनुरूप चिकित्सक रहते तो शिफ्ट में ड्यूटी करते और तनाव से मुक्त रहते। लेकिन चिकित्सक के अभाव में चिकित्सकों का तनाव काफी बढ़ गया है। गंभीर मरीजों की देखभाल के लिए आईसीयू नहीं है। जिससे मजबूर होकर चिकित्सकों को गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
पैथालॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट नदारद
बलिया। जिला महिला चिकित्सालय में पैथालॉजी है, लेकिन पैथालॉजिस्ट नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। ऐसे में महिला चिकित्सालय किसी प्रकार अपना कार्य संपादित कर रहा है। अगर महिला चिकित्सालय को पैथालॉजिस्ट व रेडियोलॉजिस्ट मिल जाए तो निश्चित ही मरीजों को लाभ मिलेगा।
विज्ञापन

एक चिकित्सक के भरोसे एसएनसीयू
बलिया। जिला महिला चिकित्सालय में सीक न्योनेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) संचालित है। जिसमें 12 बेड हैं। इसमें चार पद का मानक है, लेकिन वर्तमान में एक भी चिकित्सक तैनात नहीं है। आलम यह है कि एसएनसीयू में 12 बेड पर दो-दो या तीन-तीन मासूमों का इलाज किया जाता है। इसमें जिला अस्पताल के बजाय बाहर के ज्यादा बच्चे आते हैं। कारण कि महिला चिकित्सालय में नि:शुल्क इलाज होता है। जबकि नर्सिगिंहोमों में 25 से 30 हजार रुपये लगते हैं।
केएमसी में भी चिकित्सक का अभाव
बलिया। जिला महिला चिकित्सालय में कंगारू मदर केयर (केएमसी) इस वर्ष से संचालित है। जिसमें 34 हफ्ते से कम के बच्चों का इलाज किया जाता है। लेकिन चिकित्सक व स्टाफ की कमी से यह भी अधूरा है।
संसाधन के साथ ही चिकित्सकों की काफी कमी है। अगर संसाधन के साथ चिकित्सक मानक के अनुरूप मिल जाए तो शिफ्ट में ड्यूटी की जा सकती है और चिकित्सक तनाव मुक्त होकर मरीजों को देख सकते है।
विज्ञापन

- डा. सुमिता सिन्हा, सीएमएस, जिला महिला चिकित्सालय
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें