बलिया। तीन जिले की सीमाओं पर स्थित जनपद की एकमात्र सुरक्षित विधानसभा सीट बेल्थरारोड का अपना एक अलग मिजाज है। यहां के लोगों के बीच पिछले तीन दशक से एक धारणा बनी हुई है। कहा जाता है कि इस विधानसभा सीट से जिस दल का प्रत्याशी चुनाव जीत गया, प्रदेश में उसी दल की सरकार बनती है। इस बार भी विधानसभा सीट को अपने कब्जे में करने के लिए सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। सत्ताधारी भाजपा, बसपा के साथ ही सुभासपा-सपा गठबंधन ने परिणाम को अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। ऊंट किस करवट बैठेगा इसके पत्ते 10 मार्च को ही खुलेंगे।
बेल्थरारोड विधानसभा सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पहले इस विधानसभा को सीयर के नाम से जाना जाता था। इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद यहां दो बार चुनाव हो चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के धनंजय कन्नौजिया भारी मतों से विजयी हुए थे। उन्होंने सपा के गोरख पासवान को 18 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था। पिछले विधानसभा चुनाव में सुभासपा भाजपा के साथ ही और बीजेपी की झोली भर गई थी। सियासी जानकार इसे मोदी लहर भी मानते हैं, क्योंकि जातिगत समीकरण ध्वस्त हो गए थे। ऐसे में बेल्थरारोड सीट को बचाने के लिए बीजेपी ने अपना पूरा जोर लगा दिया है। इस सीट पर अनुसूचित और यादव वोटर अधिक हैं। मुस्लिम, ठाकुर और राजभर वोटर भी हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं।
वर्ष 2012 के चुनाव में यहां से सपा के गोरख पासवान को जीत मिली थी। उन्होंने 10 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से बसपा के छट्ठू राम को हराया था। इस बार परिस्थितियां बदली हैं। बसपा छोड़ कर छट्ठूराम भाजपा से ताल ठोक रहे हैं। विधायक धनंजय कन्नौजिया का टिकट कट गया है। सपा से टिकट न मिलने से प्रमुख दावेदार पूर्व विधायक गोरख पासवान मायूस हैं। ये सीट गठबंधन में सपा ने सुभासपा को दी है। सुभासपा से गोरखपुर के रहने वाले हंसूराम प्रत्याशी हैं। गोरख उनके कार्यक्रमों से दूर दिख रहे हैं। हालांकि अन्य सपा नेता कमाल संभाले हुए हैं। भाजपा से दावेदार रहे प्रवीण प्रकाश टिकट न मिलने पर बसपा से प्रत्याशी है। कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। कांगेस से गीता गोयल भी जुटी हुई हैं। कांटे की इस लड़ाई में सभी दल अपने पक्ष में दावे तो कर रहे हैं, लेकिन पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। यहां मुकाबला भाजपा, बसपा और सुभासपा में त्रिकोणीय रहने की संभावना है।
00000000000000000000000
कटान, जलनिकासी और उद्योग शून्यता
बलिया। प्रदेश के पूर्वी छोर पर बसे बलिया जिले की एक विधानसभा सीट बेल्थरारोड तीन जिलों की सीमाओं से घिरी है। देवरिया और मऊ से लगती सीमा पर बसा कस्बा बेल्थरारोड है। विधानसभा क्षेत्र उद्योग शून्य है। कई गांव सरयू नदी के तट पर बसे हैं। विकास के साथ ही कटान और जलनिकासी भी मुख्य मुद्दा है। इसे जिला बनाने की मांग भी उठ चुकी है, लेकिन कुछ हुआ नहीं। मां मातेश्वरी शक्तिपीठ, मां भागेश्वरी और परमेश्वरी के प्राचीन मंदिर यहां है। किसी जमाने में पीतल, कांसा और तांबा उद्योग के लिए प्रसिद्ध खैराडीह भी इसी विधानसभा क्षेत्र में है। लाल मिर्च की खेती भी होती है।
00000000000000000000000.
भाजपा-सपा से पुराना नाता
बेल्थरा रोड विधानसभा क्षेत्र को पहले सीयर विधानसभा के नाम से जानते थे। 2012 के परिसीमन के बाद सीयर को खत्म कर बेल्थरारोड सीट बनाई गगई थी। 1991 और 1996 में यहां से भाजपा के हरिनारायण राजभर विधायक बने। 1985 में लोकदल, 1989 में जनता दल, 1993, 2002 में सपा से कद्दावर नेता शारदानंद अंचल चार बार विधायक रहे। 2007 में यहां बसपा का भी खाता केदारनाथ वर्मा ने खोला था। इससे पहले 1962 में कांग्रेस के मांधाता सिंह, 1967 में सोशलिस्ट पार्टी के शिवपाल यादव, 1969 में निर्दलीय को 1980 में कांग्रेस से बब्बन सिंह, 1974 और 1977 में कांग्रेस के रफीउल्ला विधायक रहे। 2012 में परिसीमन हुआ और सीयर इसका नाम बेल्थरारोड विधानसभा कर दिया गया। 2012 में सपा से गोरख पासवान और 2017 में भाजपा का विधायक चुना गया। बेल्थरा रोड विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 357064 है। इसमें पुरुष मतदाता 193453 हैं, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 163595 है। 2022 के चुनाव में यहां भाजपा, बसपा और सुभासपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है।
0000000000000000
एक जाति के चार प्रत्याशी
भीमपुरा। इस चुनाव में भाजपा ने अपने सिटिंग विधायक धनंजय कन्नौजिया का टिकट काटकर छट्ठू राम पर भरोसा जताया है। सपा-सुभासपा गठबंधन ने हंसू राम तो बसपा ने प्रवीण प्रकाश पर अपना विश्वास जताया है। कांग्रेस से गीता गोयल प्रत्याशी हैं। सभी एक ही जाति से हैं। ऐसे में अपने स्वजातीय मतों पर कौन सबसे ज्यादा कब्जा करेगा इसे लेकर होड़ लगी हुई है।
00000000000000000
जातिगत समीकरण
बेल्थरारोड विधानसभा (सु.)
कुल मतदाता-3.57 लाख
अनुसूचित-80 हजार
यादव- 60 हजार
क्षत्रिय-25 हजार
ब्राह्मण-10 हजार
कोइरी-20 हजार
मुस्लिम-30 हजार
वैश्य-30 हजार
राजभर- 50 हजार
चौहान-10 हजार
अन्य-40 हजार
0000000000
2017 का परिणाम
भाजपा-धनंजय कन्नौजिया-77,504- 40.8 फीसदी
सपा-गोरख पासवान-59,185-31.2 फीसदी
बसपा-घूरा राम-47,297-24.9 फीसदी
----------------------