केंद्र सरकार द्वारा तीनों सेनाओं में अग्निपथ योजना के तहत जवानों की भर्ती करने को लेकर जिले के युवाओं ने मिलीं जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ का कहना है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेगें तो अधिकांश चार वर्ष बाद की स्थिती को लेकर असमंजस में है।
उनका कहना है कि जीवन के चार महत्वपूर्ण वर्ष देने के बाद युवाओं को नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खानीं पड़ेगी। जबकि सेवानिवृत्त फौजियों से अग्निपथ योजना को अनुचित बताया है। अधिोकांश का मत है कि इसराइल और रुस की तर्ज पर 12वीं के बाद सेना की नौकरी सबके लिए अनिवार्य कर दिया जाए।
रिटायर्ड जवानों का मत है कि भले ही विदेशों की तर्ज पर सरकार सेना का आधुनिकी करण की कवायद करने में जुटी है, लेकिन इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। क्योंकि अधिकांश युवा चार वर्ष बाद रोजगार के लिए इधर-उधर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाएंगे। हालांकि योजना के तहत सरकार बेरोजगारी की समस्या के निदान के लिए तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की है।
इसके तहत अल्प अवधि यानि चार साल के लिए संविदा पर सेना में युवाओं की भर्ती की जाएगी। हर साल 10 वीं और 12 वीं पास साढ़े सत्रह साल से लेकर 21 वर्ष की आयु के 46000 युवाओं को इस योजना के तहत बतौर अग्निवीर जवान भर्ती किया जाएगा। इन्हें आकर्षक वेतन के साथ एकमुश्त सेवा निधि भी दी जाएगी।