जिला अस्पताल परिसर स्थित टीबी क्लीनिक शोपीस बना हुआ है। पिछले एक माह से चिकित्सक न होने के कारण इलाज की उम्मीद लेकर दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हो रहे हैं। ठंड में टीबी मरीजों की समस्याएं ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसमें चिकित्सक के अभाव के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परेशानी के बीच भी जिम्मेदार खामोशी साधे बैठे हैं।
टीबी क्लीनिक में मंगलवार को दर्जनों मरीज चिकित्सक का इंतजार कर रहे थे। उन्हें बैठा देख कर्मचारियों ने बताया की डाॅक्टर का स्थानांतरण हो गया है। अस्पताल के ओपीडी में किसी फिजिशियन से जांच करवा लें। टीबी क्लीनिक में तैनात रहे डाॅ. शत्रुधन पांडेय का एक माह पूर्व नरहीं स्थानांतरण होने के बाद अब तक कोई चिकित्सक तैनात नहीं हुआ। मौसम के बदलवा से कम इम्युनिटी होने के कारण क्षय रोगियों की कई समस्याओं से परेशान मरीज इलाज की आस में टीबी क्लीनिक पहुंच रहे हैं। वहां उन्हें निराशा मिल रही है। चिकित्सक न रहने के कारण कर्मचारी भी मनमानी डयूटी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या एमडीआर मरीजों की हो रही है। कुछ मरीज अस्पताल के ओपीडी में इलाज करवा रहे हैं। जिससे कम इम्युनिटी के दूसरे बीमारी से पीड़ित मरीजों को क्षय रोग होने का खतरा बना हुआ है। शासन की तरफ से टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। घर-घर क्षय रोगी खोजे जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ टीबी रोगियों व लक्षण वाले मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सक नही मिल रहे हैं। जिससे तमाम समस्याएं खड़ी हो गई है।
टीबी क्लीनिक में डॉक्टर की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। जिससे मरीजों को इलाज बेहतर ढंग किया हो सके। डाॅ. विजयपति द्विवेदी, सीएमओ।