बैरिया क्षेत्र में बिजली विभाग की लापरवाही से एक से दो घंटे ही बिजली रह रही है। आलम यह है कि बिजली के अभाव में सीएचसी और पीएचसी पर टार्च जलाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
बिजली की दुर्दशा को लेकर क्षेत्र के आम लोगों सहित व्यापारियों ने कई बार आंदोलन किया लेकिन आश्वासन के सिवाय कभी भी पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल सकी। इसके चलते क्षेत्र के लोगों में शासन-प्रशासन सहित बिजली विभाग के विरुद्ध लोगों में गहरी नाराजगी है।
धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि द्वाबा में पहली बार सपा के प्रत्याशी को लोगों ने यहां से यह सोचकर विधायक बनाया कि सपा की सरकार आएगी और यहां की बिजली सहित अन्य समस्याओं का निस्तारण हो जाएगा लेकिन अन्य समस्याओं को निस्तारण की बात तो दूर, बिजली की स्थिति तो दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
विजय कांत पांडेय का कहना है कि क्षेत्र में बिजली की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। बिजली को लेकर आम लोगों और कारोबारियों ने कई बार आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने जल्द बिजली में सुधार का आश्वासन दिया गया लेकिन आश्वासन अब तक फिसड्डी साबित हुआ है।
ऐसे में लोग बिजली विभाग के साथ ही प्रशासन से काफी नाराज हैं। प्रवीण कुमार सिंह द्वाबा क्षेत्र के लोगों ने जिस तरह से देश की आजादी में कुर्बानी दी, बावजूद शासन-प्रशासन को द्वाबा के लोगों की दशा पर तरस नहीं आ रही है। आलम यह है कि बिजली के अभाव में सरकारी अस्पतालों में टार्च के प्रकाश में मरीजों का इलाज चल रहा है।
मनोज कुमार ओझा ने बताया क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के लिए लोगों के लाख प्रयास के बावजूद कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि उमस भरी गर्मी में मात्र एक या दो घंटे बिजली लोगों को मिल पा रही है। आंदोलनों का असर पर शासन-प्रशासन पर कहीं से नहीं दिख रहा है।
आंदोलन के दौरान प्रशासिनक अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करा लेते हैं लेकिन बिजली आपूर्ति में कोई सुधार नहीं दिखता। यदि यही स्थिति रही तो लोग सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।