बैरिया। महानगरों से दीपावली और छठ पर्व पर घर आने वाले परदेशियों को विभिन्न ट्रेनों में टिकट मिलना नामुमकिन दिख रहा है। उनके लिए एकमात्र विकल्प तत्काल टिकटों पर यात्रा है। इसका फायदा टिकट दलालों की ओर से खूब उठाया जा रहा है।
दीपावली से भी अधिक महत्व छठ पर्व का बलिया और बिहार के लिए है। बिहार और बलिया के लोग विभिन्न प्रदेशों में नौकरी और व्यापार करते हैं। दीपावली में घर आने की कोशिश में अगर चूक भी गए तो छठ पर्व पर बलिया और बिहार जरूर पहुंचते हैं। महत्वपूर्ण ट्रेनों में 100 से अधिक वेटिंग लिस्ट होने से उन्हें घर आने के लिए ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल लग रहा है। अप ट्रेनों में कोई खास वेटिंग नहीं है। कोशिश के बाद महानगरों में जाने के लिए फिलहाल टिकट मिल रहा है। इधर से जाने वाले यात्रियों की पूजा बाद टिकट के लिए परेशानियों का सामना करना तय है।
चार नवंबर को दीपावली और नौ नवंबर को छठ पूजा है। घर आने वाले परदेशी टिकटों के लिए परेशान हैं। लोकमान्य तिलक टर्मिनल से आने वाली डाउन पवन एक्सप्रेस (01061) के स्लीपर में 374 से 669 वेटिंग, थर्ड एसी में 78 से 171 वेटिंग, 2एस बोगी में नो रूम है। वहीं, अहमदाबाद से आने वाली डाउन साबरमती एक्सप्रेस (09165) के स्लीपर कोच में 133 से 345 वेटिंग, थर्ड एसी में 45 से 95 वेटिंग, 2एस में 73 से 146 वेटिंग चल रही है। लुधियाना से आने वाली डाउन सरयू-यमुना एक्सप्रेस (04650) के स्लीपर में 168 से 245, थर्ड एसी में 40 से 75 वेटिंग, 2एस में 158 से 268 वेटिंग चल रही है। सूरत से आने वाली डाउन ताप्ती गंगा एक्सप्रेस (09045) के स्लीपर में 239 से 368 वेटिंग, थर्ड एसी में 61 से 98 वेटिंग, 2एस में 105 से 175 वेटिंग चल रही है। दिल्ली से आने वाली डाउन स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस (02562) के स्लीपर कोच में 39 से 79 वेटिंग, थर्ड एसी में 22 से 45 वेटिंग, 2एस में 17 से 46 वेटिंग चल रही है।
डाउन में आने वाली सभी ट्रेनों में छठ पर्व तक काफी भीड़ होती है। टिकट मिलने में दिक्कत होती है। वहीं, फिर छठ पूजा के बाद परदेशी पुन: वापस जाने लगते हैं। इससे कुछ दिनों के लिए महानगरों की तरफ जाने वाली ट्रेनों में भीड़ होना स्वाभाविक है। - कमलेश मीणा, वाणिज्य अधीक्षक सुरेमनपुर।