आरपीएफ प्रभारी एके सिंह ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि उसके द्वारा फर्जी नाम पते से आईआरसीटीसी की पर्सनल यूजर आईडी बनाकर उससे ई-टिकट बनाया जाता था। ग्राहकों से 500 से 1000 रुपये प्रति टिकट लाभ लेकर बेचा जाता है।
उनके द्वारा रेलवे के तत्काल व सामान्य ई-टिकट के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर रेड मिर्ची व रेडबुल का पहले तथा वर्तमान में डेल्टा का इस्तेमाल करके बनाया जाना स्वीकार किया। अभियुक्तगण आईआरसीटीसी के अधिकृत एजेंट भी हैं।