सुखपुरा। कस्बा निवासी प्रियांशु कुमार सिंह ने भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट बनकर गांव और परिवार का नाम रोशन किया है। पांच सितंबर को पासिंग आउट परेड में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। लेफ्टिनेंट बनने के बाद गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने स्वागत किया।
आठ जुलाई 2002 को मंजीत कुमार सिंह उर्फ धनंजय और प्रियंका सिंह के पुत्र तथा बच्चा सिंह के पौत्र प्रियांशु की प्रारंभिक शिक्षा सुखपुरा में हुई। इसके बाद उन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल बीकानेर और आर्मी पब्लिक स्कूल मामून कैंट, पठानकोट से शिक्षा प्राप्त की। जयपुर से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से उनका चयन भारतीय थल सेना में हुआ।
ओटीए गया में करीब एक वर्ष के कठोर सैन्य प्रशिक्षण के बाद उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली। प्रियांशु का परिवार लंबे समय से सेना से जुड़ा है। उनके पिता मंजीत कुमार सिंह 17वीं बटालियन, द महार रेजिमेंट से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। चाचा राजीव कुमार सिंह ऑनरेरी कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि दूसरे चाचा अजय कुमार सिंह उर्फ रामबाबू सेना में सूबेदार मेजर-ऑनरेरी कैप्टन के पद पर सेवारत हैं। गांव पहुंचने पर सैकड़ों ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान परिवार के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे।
सुरेमनपुर स्टेशन पर लेफ्टिनेंट बने धीरज तिवारी का स्वागत
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बैरिया। भारतीय सेना में नवनियुक्त लेफ्टिनेंट धीरज कुमार तिवारी का रविवार को सुरेमनपुर स्टेशन पर स्वागत किया गया। जननायक बाबू मैनेजर सिंह राजकीय पॉलीटेक्निक, बैरिया के निदेशक अभिषेक कुमार सिंह ने उनका सम्मान किया। उन्हें सम्मानित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। लेफ्टिनेंट धीरज तिवारी की सफलता से क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। निदेशक अभिषेक कुमार सिंह ने उनकी उपलब्धि को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और राष्ट्रसेवा से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। धीरज तिवारी ने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम का संदेश देती है। संस्थान युवाओं को तकनीकी शिक्षा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का प्रयास करता है। यह सम्मान युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की परंपरा का हिस्सा है। संवाद