बलिया। जनपद में सरयू नदी पर चांदपुर के सामने 176.02 करोड़ और गंगा नदी पर श्रीरामपुर घाट पर 640.91 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण किया रहा है। सरयू नदी पर पुल के एप्रोच और अन्य कार्य के लिए लोनिवि को 10 करोड़ और गंगा नदी पर बन रहे पुल के एप्रोच आदि के लिए 25 करोड़ की धनराशि दी गई है। बरसात और बाढ़ के कारण कार्य प्रभावित है। इसे जल्द पूरा करने की बात कही जा रही है।
एप्रोच रोड पूरा नहीं होने के कारण दुबहर क्षेत्र के शिवरामपुर घाट पर बनाया गया जनेश्वर मिश्रा सेतु उद्घाटन की बाट जोह रहा है। वर्ष 2015 से शिवरामपुर घाट पर पुल का निर्माण शुरू किया गया था। निर्माण के लिए 640.91 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई थी। इसमें लगभग 442 सेतु निगम और लगभग 198 करोड़ पीडब्ल्यूडी का अंश था। पुल का निर्माण पूर्ण हो चुका है। पुल के दोनों तरफ 4.50 किलोमीटर का एप्रोच मार्ग का निर्माण पीडब्ल्यूडी की ओर से शुरू करा दिया गया है। एप्रोच का कार्य भी पुल के दोनों तरफ लगभग पूरा हो गया है। एप्रोच पर पिचिंग का कार्य आधे से अधिक बाकी है। धन की कमी से कार्य प्रभावित था। शासन की ओर से 15 करोड़ की धनराशि और जारी की गई है। उधर, निर्माणाधीन एप्रोच के सहारे ही वाहनों का पुल से आवागमन शुरू हो गया है। श्रीरामपुर घाट पर बने जनेश्वर मिश्रा सेतु से यूपी और बिहार की दूरी काफी कम हो गई है। गंगा उस पार बसे दुबहर और बेलहरी ब्लॉक के कई गांव भी इस पुल के चलते अपने को सहज महसूस कर रहे हैं। पुल के अभाव में उन्हें जिला मुख्यालय पर आने के लिए घंटों नाव में बैठकर यात्रा करनी पड़ती थी।
बारिश के कारण प्रभावित है कार्य
सहतवार। राज्य सेक्टर योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री की घोषणा से आच्छादित चांदपुर के सामने सरयू नदी पर निर्माणाधीन सेतु की कुल लागत 176.02 करोड़ है। इसमें सेतु निगम का अंश 117.83 करोड़ और पीडब्ल्यूडी का अंश लगभग 58 करोड़ है। पुल की लंबाई 1313.68 मीटर है। सरयू नदी में बाढ़ के कारण कार्य बाधित है। इससे पहले एप्रोच रोड निर्माण के लिए टीएस बंधे से एक किलोमीटर तक मिट्टी का का कार्य किया जा चुका है। बांध की चौड़ाई 30 मीटर है। जेई आरपी सिंह ने बताया कि बाढ़ से जलमग्न होने के कारण कार्य रुका हुआ है। उमेश यादव और प्रधान रंजय सिंह ने बताया कि कार्य बहुत दिनों से चल रहा है, लेकिन गति काफी धीमी है। रामजी यादव ने कहा कि समय पर सही ढंग से कार्य हुआ होता तो पूरी सड़क का निर्माण हो गया होता। सड़क बाधित होने से खेत जलमग्न हैं। सड़क बन गई होती तो खेत जलमग्न नहीं होते। एई आशीष शुक्ला का कहना है कि एक किलोमीटर तक मिट्टी का कार्य हुआ है। नदी का पानी बढ़ने से कार्य में बाधित हुआ है। मिट्टी फेंकने का समय मार्च 2022 तक का लक्ष्य रखा गया है।