पंदह। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो रहा है। बृहस्पतिवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर एवं एमओआईसी केंद्र पंदह में 14 के सापेक्ष तीन कर्मचारी ही मौजूद मिले। यही नहीं चिकित्सक समेत अन्य कक्ष में तला लटका मिला।
यह हाल तब है जब मौसम में बदलाव के कारण संक्रामक बीमारियों के मरीजों में तेजी से इजाफा हुआ है। सुबह करीब 10: 20 पर अस्पताल खुला मिला। लेकिन मौके पर सिर्फ दो फार्मासिस्ट गिरीश सिंह और शिवजी यादव मौजूद मिले। चौकीदार एवं स्वीपर फूलचंद राम भी ड्यूटी पर मुस्तैद नजर आए। चिकित्साधिकारी डॉ. मंजीत आनंद, चिकित्साधिकारी द्वितीय डॉ. अंकित सिंह, लैब टेक्नीशियन अखिलेश कुमार यादव का कक्ष बंद मिला। इसके अलावा कार्यालय कक्ष, वैक्सीन कक्ष और ड्रेसिंग रूम भी बंद थे।
शासन का निर्देश पूर्वाह्न 10 से शाम 4 बजे तक अस्पताल खोलने का है। बावजूद चिकित्सक और कर्मचारियों की मनमानी है। मौके पर मौजूद स्थानीय निवासी श्रीनिवास ने बताया कि यहां तैनात चिकित्सक आए दिन अस्पताल से गायब रहते हैं। यदि कोई आता भी है तो आने का कोई समय निश्चित नहीं है। इसके चलते मरीजों को या तो झोलाछाप की सहायता लेनी पड़ती है या फिर घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौटना पड़ता है।
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दो चिकित्सकों सहित 14 लोगों की है तैनाती : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पंदह में प्रभारी चिकित्साधिकारी प्रथम और चिकित्साधिकारी द्वितीय समेत कुल 14 स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती है। जिसमें फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, नेत्र सहायक, लिपिक, वार्ड ब्वाय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि यहां स्वीकृत की 24 पदों के सापेक्ष 10 कर्मचारी कम तैनात हैं। जिसमें दो चिकित्सकों के अलावा फार्मासिस्ट, कंप्यूटर अन्वेषक, एलटी, वार्ड ब्वाय, चपरासी, चौकीदार, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक पुरुष और महिला शामिल हैं।
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आयुर्वेदिक चिकित्सालय में लटक रहा था ताला
एमओआईसी पंदह के कैंपस में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर भी सुबह 10: 35 तक बंद मिला। पूछने पर पता चला की अभी कोई आया नही है। यहां तैनात चिकित्सक आशीष मौर्य के जिम्मे दो हॉस्पिटल की जिम्मेदारी है जबकि फार्मासिस्ट आए ही नहीं थे
लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएचसी-पीएचसी व आरोग्य मंदिर पर आने वाले मरीजों को समय से इलाज नहीं मिलेगा तो संबंधित प्रभारी व चिकित्सक की जवाबदेही होगी। पंदह अस्पताल पर समय से न आने वाले चिकित्सक व कर्मचारियों की जांच कर कार्रवाई होगी। - डाॅ. पद्मवती , एसीएमओ बलिया।