बलिया। विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अभी हालांकि एक पखवाड़े से अधिक का वक्त है, लेकिन मतदाताओं की खामोशी राजनीतिक दलों के साथ-साथ उम्मीदवारों की चिंता भी बढ़ा रही है। जिले में छठे चरण के तहत तीन मार्च को मतदान होना है। इस बार कोविड प्रोटोकॉल के कारण राजनीतिक दलों के उम्मीदवार बड़ी जनसभाएं, रोड शो नहीं कर पा रहे हैं।
चुनाव प्रचार के लिए बेहद कम समय मिलने के कारण प्रत्याशियों पर अधिक से अधिक वोटरों तक पहुंचने का दबाव है। ऐसे में प्रत्याशियों के सामने घर-घर वोटरों से संपर्क का प्रमुख जरिया बचा है। लेकिन डोर-टू-डोर जनसंपर्क जनसंपर्क और डिजिटल संवाद के माध्यम से प्रत्याशी अभी तक मतदाताओं के रुख को भांप नहीं पा रहे हैं। मतदाताओं की खामोशी से उम्मीदवारों की सांसें फूल रहीं हैं।
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अब सबकी बात कर रहे मतदाता
बलिया। पांच साल इंतजार के बाद अब बारी मतदाताओं की है। मतदाता भी इसे बखूबी जानते हैं। यही कारण है कि अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। एक ही गांव में एक ही दिन में विभिन्न दलों के नेता पहुंचकर जन संपर्क कर रहे हैं। मतदाता भी सभी प्रत्याशियों को उनके पक्ष में मतदान करने का आश्वासन दे रहे हैं। ऐसे ही एक वोटर का कहना था कि पांच साल तो नेता जी भी आश्वासन देते हैं। अब मौका हम मतदाताओं को मिला है।
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सोशल मीडिया पर कर रहे प्रचार
डोर-टू-डोर संपर्क के अलावा विभिन्न दलों के आईटी प्रकोष्ठ से जुड़े कार्यकर्ता अपने पार्टी और प्रत्याशी के पक्ष में हवा बना रहे हैं। सभी पार्टियों के कार्यकर्ता एवं समर्थक फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर पर सक्रिय हैं। बड़े नेताओं के बयानों को आधार बनाकर पोस्ट डाल रहे हैं। साथ ही अपने दलों की खूबियां गिना रहे हैं। समर्थक कई नामों से पेज और आईडी बना रहे हैं। पोस्ट के बाद कमेंट आने पर उसका जवाब भी दे रहे हैं।
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