बलिया। लॉकडाउन की मार से वैसे तो छोटे-बड़े सभी व्यवसायिक गतिविधियों पर खासा असर पड़ा है। लेकिन कपड़ा कारोबार से जुड़े लोगों की हालत कुछ ज्यादा ही खास्ता हो गई है। कारण कि इन्हें वैसे ही आठ माह व्यवसाय करने और चार माह 15 जून से 15 अक्तूबर तक मंदी की मार झेलनी पड़ती थी। अब मार्च से हुए लाकडाउन ने इसे बढ़ाकर सात माह कर दिया है। इससे कपड़ा कारोबारियों के समक्ष पूंजी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
हालांकि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सरकार ने लाकडाउन के चौथे चरण में रोस्टर के तहत तीन दिन कपड़ा की दुकानों को खोलने की अनुमति दे रखी है, लेकिन इससे क्षतिपूर्ति होती नहीं दिख रही। इस कारोबार से जुड़े जानकारों की मानें तो सप्ताह में तीन दिन दुकानें खुलने से महज बीस फीसदी का व्यवसाय हो रहा है। इससे दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन भी निकल पाना मुिश्किल हो रहा है। इससे कामगार भी परेशान हैं। बताते हैं कि बाजार तो मुख्यतया लगन में ही चलता था, लेकिन लाक डाउन के चलते सभी वैवाहिक गतिविधियां या तो ठप हैं या फिर नवंबर, दिसंबर तक टल गई हैं। और तो और काम-धंधा बंद होने से ग्राहकों की आय भी बाधित हुई है, इससे उनकी क्रय क्षमता में कमी आई है, जो सीधे व्यवसाय को प्रभावित कर रही है।
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जिले में संचालित हैं पांच सौ दुकानें
जिलें में कपड़ा कारोबार से जुड़ी करीब पांच सौ दुकाने हैं। लेकिन लाकडाउन सभी के लिए परेशानी का सबब बना है। गांवों और कस्बों में संचालित दुकानों पर खरीद-बिक्री प्रतिशत काफी कम हो गया है। इसके कारण बड़े दुकानदारों के सामने कारोबार बचाने का संकट पैदा हो गया है।
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कपड़ा कारोबार के नजरिये से लाकडाउन बेकार रहा,मूल तौर लगन के दौरान चलने वाला जिले का कपड़ा कारोबार इस बार लंबी मंदी की चपेट में आया है। जिससे दुकानदारों के सामने पूंजी बचाने का संकट पैदा हो गया है। यही आलम रहा तो कारोबारी और कर्मचारी के लिए भविष्य मुश्किलों भरा होगा।-रामकुमार मुन्ना
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सप्ताह में तीन दिन दुकान खुलनें से लाकडाउन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। इससे तो दुकान संचालन में आने वाला खर्च भी निकाल पाना मुश्किल हो गया है। जिला प्रशासन को शर्ता के साथ छह दिन दुकानें खोलने की अनुमति देने पर विचार करना चाहिये।-मनोज कुमार सिंह
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लाकडाउन में हुई पूर्ण बंदी की जगह तीन दिन दुंकान खोलने की अनुमति से कुछ राहत जरूर मिली है। इससे धीरे-धीरे कारोबार पटरी पर आ रहा है। कमोबेश यह कहा जा सकता है कि बंद से बेहतर पहल है और भविष्य में नुुकसान की भरपाई भी हो सकेगी।-सुधीर कुमार गुप्ता मोती
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लाकडाउन के चौथे चरण में तीन दिन दुकान खोलने की अनुमति से कपड़ा करोबारियों को संजीवनी मिली है। धीरे-धीरे हालात सामान्य होने पर परिस्थितियां अनुकूल होने लगेंगी। हालांकि लाकडाउन ने कारोबार काफी क्षति पहुंचाई,लेकिन जिला प्रशासन की पहल सराहनीय है।-अजय कुमार जायसवाल