इसी दौरान अचानक उपकेंद्र से किसी ने सप्लाई चालू कर दी, इससे वह करंट की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस कर नीचे गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें जिला अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पत्नी पूनम सहित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक के दो छोटे बच्चे आर्यन (7) और सौम्या (6) हैं।
बृहस्पतिवार को सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण खेजुरी थाने पहुंच गए और घटना को लेकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया। थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार के समझाने पर ग्रामीण शांत हुए और घटना से संबंधित लिखित शिकायत की। इसमें एसडीओ वीर बहादुर, अवर अभियंता रामपाल, फीडर पर तैनात रहे कर्मचारी अरविंद राजभर और एसएफ सत्यपाल सहित 5 लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप था कि शटडाउन लेने के बावजूद लापरवाही से सप्लाई चालू कर दी गई, जिसके चलते यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने इसे अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा तथा मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे।
करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे अधिशासी अभियंता ने परिजनों से बात कर विभागीय सहायता सहित बीमा की राशि यथाशीघ्र दिलवाने का आश्वासन दिया। थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार ने बताया कि मृतक की पत्नी की तहरीर के आधार पर मौके पर तैनात रहे कर्मचारी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।