पूछने लगे की कोई सरकारी कर्मी नहीं है तो आप लोग क्या कर रहे हैं। प्राइवेट कर्मियों के पास कोई जवाब नहीं था। वह न्यायालय से बाहर निकल आए और गेट बंद कर दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताते हुए तहसीलदार न्यायालय गए। वहां भी कोई भी उपस्थित नहीं था। न्यायालय खुला हुआ था, सब कुछ लावारिस था। इसको देखकर अधिवक्ता गुस्से से लाल हो गए। कहा कि अगर फाइल या कोई सामान चोरी होता है कौन जिम्मेदार होगा।
नायब तहसीलदार न्यायालय में भी एक प्राइवेट व्यक्ति बैठकर फाइल एकत्र कर रहा था। वहां भी अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई। इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में तैनात पेशकार अर्पित गुप्त पहुंच गए। कहा कि माल कार्यालय के कार्य को देख रहा था।
नायब तहसीलदार कार्यालय के पेशकार अजीत यादव वकीलों के हंगामा को देखकर आए और बताया कि न्यायालय के कार्य से चकबंदी कार्यालय में गया था। अधिवक्ता उनके तर्क को सुनने को तैयार नहीं थे। अधिवक्ता देवेंद्र मिश्रा, रुद्रदेव कुंवर, अजय सिंह ने बताया की तहसील की व्यवस्था अराजक हो गई है। 2023 से यहां व्यवस्था में गड़बड़ी चली आ रही है। कोई भी इसे सुधारना नहीं चाह रहा है।
न्यायालय के पेशकार और अहलमद के घर शादी है, वह छुट्टी पर हैं। बुधवार को न्यायालय नहीं चलता है, अधिवक्ता न्यायालय बुधवार को नहीं चलाते हैं। वादकारियों व अधिवक्ताओं को परेशानी न हो जिससे न्यायालय खुला था। अन्य सरकारी कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई थी। थोड़ी देर के लिए कर्मी किसी कार्य से अन्य दफ्तर में चले गए होंगे। व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। - संजय कुशवाहा, उपजिलाधिकारी, बैरिया