कोरोना संक्रमण के दौर में सरकारी दावों की पोल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर खुल रहा है। सरकारी अस्पतालों की स्थिति बद से बदतर है। वहीं सरकारी अधिकारी कर्मचारी आंकड़ों की बाजीगरी में लगे हुए हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा सिर्फ नाम का अस्पताल रह गया है। चिकित्सकों के अभाव में रोगी झोला छाप डॉक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं। जीवन रक्षक दवाइयों का अभाव व महिला चिकित्साधिकारी के नहीं रहने के कारण यह अस्पताल महज नाम भर के लिए अस्पताल रह गया है। एक्सरे मसीन है लेकिन एक्सरे प्लेट के अभाव में एक्सरे नहीं होता। लैब टेक्नीशियन के होते हुए भी एक दो तरह की जांच को छोड़कर यहां कोई जांच नहीं होती क्योंकि यहां संसाधन ही मौजूद नहीं है। जेनरेटर मौजूद है लेकिन बजट के अभाव में डीजल नहीं होने के कारण बिजली नहीं रहने पर अस्पताल परिषर में अंधेरा ही अंधेरा रहता है।
30 बेडों वाले इस अस्पताल में अधिकांश पंखे खराब पड़े हुए हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में समाजसेवी सूर्यभान सिंह व एडीआरएम निर्भय नारायण सिंह द्वारा अस्पताल को ऑक्सीजन व कंसट्रेटर उपलब्ध कराने से लोगों को जरूर राहत पहुंची अगर इस अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की नियुक्ति कर संसाधन उपलब्ध करा दी जाए तो लोगो के लिए यह अस्पताल वरदान साबित होगा।
पद- स्वीकृति पद व तैनाती
चिकित्सक - स्वीकृत पद 7 तैनाती 2
फार्मासिस्ट - स्वीकृत पद 3 तैनाती 3
वार्ड ब्वॉय - स्वीकृत पद 2 तैनाती 1
लैब टेक्नीशियन - स्वीकृत पद 1 तैनाती 1
स्टॉफ नर्स - पद 3 तैनाती 3
एक्सरे टेक्नीशियन - पद 1 तैनाती 1
डार्क रूम असिस्टेंट - पद 1 तैनाती 1
क्लीनर - पद 1 तैनाती 1
वासर मैन - पद 1 तैनाती 1
चपरासी - पद 1 तैनाती 1
स्वीपर - पद 1 तैनाती 1
सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर व्यवस्था देने का प्रयास किया जा रहा है। अगर अस्पताल को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस कर दिया जाए तो निश्चित रूप से लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
- आशीष कुमार श्रीवास्तव, अधीक्षक, सीएचसी सोनबरसा